यह ट्रेन बन जाती है विश्वकर्मा पूजा स्पेशल

Bibhash Chandra | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: September 17, 2017, 9:29 PM IST
यह ट्रेन बन जाती है विश्वकर्मा पूजा स्पेशल
ट्रेन में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा
Bibhash Chandra | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: September 17, 2017, 9:29 PM IST
धनबाद से हावड़ा के बीच चलने वाली कोलफिल्‍ड एक्‍सप्रेस में विश्‍वकर्मा पूजा की अनोखी परंपरा है. इस ट्रेन में 40 साल से भी ज्यादा समय से विश्‍वकर्मा पूजा होती आ रही है. धनबाद से चलने वाली कोलफिल्ड एक्सप्रेस आज रविवार को विश्वकर्मा पूजा स्पेशल बन गई.

आज विश्वकर्मा पूजा के दिन ट्रेन के ड्राइवर समेत सभी यात्रियों ने इसे सेलेब्रेट किया. इस तरह पूरी ट्रेन भक्ति के रंग में रंग गई. ट्रेन के सभी बोगियों को फूल-माला और केले के पत्‍तों से सजाया गया. धनबाद से हावड़ा के बीच रोज चलने वाली कोलफिल्ड एक्सप्रेस हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के दिन विश्वकर्मा पूजा स्पेशल बन जाती है. गाजे बाजे के साथ यात्रियों ने ट्रेन के चालक और गार्ड के साथ मिलकर इंजन की पूजा कर अपना सफर शुरू किया. ट्रेन के कुल 18 कोचों में शामिल चार पैसेंजर बोगियों में भी भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा रखकर पूरे भक्ति भाव से पूजा की गई और प्रसाद का वितरण किया गया.

इस ट्रेन से यात्रा करने वाले हिंदू, मुस्‍लिम, सिख, ईसाई आदि धर्म के लोग मिलकर भगवान विश्‍वकर्मा की पूजा करते हैं. भगवान विश्वकर्मा की आराधना में सभी एक साथ शामिल हुए और एकता की मिसाल देखने को मिली. वैसे इस वर्ष रविवार होने से यात्रियों की संख्या काफी कम थी. ज्यादातर लोग नौकरी और व्यवसाय के लिए ही प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में इस ट्रेन में सफर करते हैं. 264 किलोमीटर का सफर प्रतिदिन चार घंटों में पूरी होती है.

धनबाद से हावड़ा के बीच कोलफिल्ड एक्सप्रेस कुल 11 स्टेशनों पर रूकती है. इस ट्रेन के चालक शशि भूषण पासवान ने कहा कि भगवान विश्‍वकर्मा के चलते ही इसमें सवार सभी लोगों की यात्रा मंगलमय होती है. इस भागदौड़ की जिंदगी में रोजी रोजगार करने वाले लोग अपना प्रतिदिन करीब 9 से 10 घंटे ट्रेन में ही गुजारते हैं.

ऐसे में झारखंड के धनबाद से बंगाल के हावड़ा तक सफ़र करने वाले इन यात्रियों के लिए घर द्वार से लेकर दुकान तक यही ट्रेन है. इसी कारण से यहां ट्रेन में ही भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की परम्परा चली आ रही है.
First published: September 17, 2017
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