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7 साल की बच्ची को मसीहे का इंतजार, इस वजह से कमरे में सिमट गया है बचपन

News18 Jharkhand
Updated: October 21, 2019, 1:11 PM IST
7 साल की बच्ची को मसीहे का इंतजार, इस वजह से कमरे में सिमट गया है बचपन
गांववाले खुद को बबीता से दूर रखते हैं, जबकि समाजसेवी अंजूला मुर्मू घर जाकर उसके साथ खेलती हैं.

दादा मुंशी टुडू का कहना है कि परिवार (Family) की आर्थिक स्थिति (Economic Condition) ऐसी नहीं है कि बच्ची (Victim) का इलाज जारी रखा जा सके. कहीं से कोई मदद मिल जाती, तो बबीता को नई जिंदगी मिल जाती.

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दुमका. जिस उम्र में बच्चे आजाद परिंदे की तरह होते हैं, उसी उम्र में दुमका की एक बच्ची (Victim) ने खुद को एक कमरे में समेट लिया है. दुमका के मसलिया प्रखंड के अगोआ गांव की 7 साल की बबीता मरांडी गंभीर रोग (Serious Disease) से पीड़ित है. बीमारी की वजह से उसका पूरा शरीर इस कदर हो गया है कि गांववाले (Villagers) उससे परहेज करने लगे हैं. गांव का कोई बच्चा (Children) उसके साथ खेलना नहीं चाहता. नतीजा बबीता का बचपन बंद कमरे में बीत रहा है.

3 साल की उम्र से शुरू हुई परेशानी

बीमारी के कारण बबीता मरांडी का शरीर सिकुड़ कर झड़ रहा है. गांववाले अपने बच्चों को उसके पास फटकने तक नहीं देते. लेकिन बबीता का जन्म से ये हाल नहीं था. 3 साल की उम्र से परेशानी हुई, धीरे-धीरे रोग पूरे शरीर में फैल गया. गरीब माता-पिता दुमका से लेकर रांची तक उसका इलाज करा चुके हैं. जब तक दवाई चलती है, तब तक रोग में सुधार होता है. लेकिन दवा छूटते ही फिर से परेशानी शुरू हो जाती है.

दादा मुंशी टुडू का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि बबीता का इलाज जारी रखा जा सके. कहीं से कोई मदद मिल जाती, तो बबीता को नई जिंदगी मिल जाती.

बच्ची के लिए सरकार-समाज को आना चाहिए आगे

समाजसेवी अंजुला मुर्मू जब भी मसलिया जाती हैं, बबीता से जरूर मिलती हैं. उसके लिए टॉफी-बिस्किट और खिलौने लेकर जाती हैं. उसके साथ बातें करती हैं और खेलती भी हैं. बबीता भी अंजूला मुर्मू को देख कर काफी खुश होती है. अंजूला का कहना है कि इस सात साल की बच्ची के लिए सरकार से लेकर आम लोगों को भी मदद के लिए आगे आना चाहिए.

सिविल सर्जन डॉ. अनंत कुमार झा ने भरोसा दिलाया है कि बच्ची के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग हर संभव मदद करेगा. अगर परिवार का आयुष्मान कार्ड नहीं बना है, तो विभाग प्राथमिकता के आधार पर कार्ड बनाकर देगा, ताकि बबीता का इलाज हो सके.
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बबीता को उसका बचपन वापस मिल सके, इसके लिए परिवारवालों को किसी मसीहे का इंतजार है.

रिपोर्ट- पंचम झा

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First published: October 21, 2019, 1:06 PM IST
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