मंदिर बंद है तो क्या हुआ, यहां कर सकते हैं बाबा बासुकीनाथ के भव्य श्रृंगार रूप का दर्शन
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मंदिर बंद है तो क्या हुआ, यहां कर सकते हैं बाबा बासुकीनाथ के भव्य श्रृंगार रूप का दर्शन
तीर्थ पुरोहितों द्वारा इनदिनों बाबा बासुकीनाथ का रोजाना भव्य श्रृंगार किया जा रहा है.

Basukinath Temple: फौजदारी दरवार नागेश नाम से फेसबुक पेज और वाट्सएप ग्रुप बनाये गये हैं. जहां प्रतिदिन बाबा बासुकीनाथ के श्रंगार और संध्याकालीन आरती की तस्वीरें शेयर की जाती हैं. और भक्त बाबा का दर्शन कर पा रहे हैं.

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दुमका. कोरोना बंदी (Lockdown) के कारण देशभर के धार्मिक स्थल बंद हैं. दुमका के प्रसिद्ध बासुकीनाथ मंदिर (Basukinath Temple) का भी पट पिछले दो महीने से आम श्रद्धालुओं (Devotees) के लिए बंद है. लेकिन सोशल मीडिया पर भक्त बासुकीनाथ बाबा का दर्शन कर पा रहे हैं. दरअसल इनदिनों मंदिर के तीर्थ पुरोहितों द्वारा फौजदारी बाबा का भव्य श्रृंगार किया जा रहा है. विभिन्न प्रकार के फूल, विल्बपत्र, भांग और धथूरे से शिवलिंग को सजाया जा रहा है. कभी त्रिशूल-चंद्रमा बनाये जाते हैं, तो कभी बाबा का अर्धनारीश्वर रूप.

बाबा के नाम से बनाये गये फेसबुक पेज और वाट्सऐप ग्रुप

दरअसल भक्तों के प्रवेश वर्जित होने के कारण तीर्थ पुरोहितों को इनदिनों बाबा का श्रंगार करने के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है. श्रंगार शिव को प्रिय भी है. प्रधान तीर्थ पुरोहित परिवार के वंशज उज्जवल झा का मानना है कि बासुकीनाथ मंदिर पर देश-विदेश के लोगों की आस्था है. भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए तीर्थ पुरोहितों द्वारा फौजदारी दरवार नागेश नाम से फेसबुक पेज और वाट्सएप ग्रुप बनाये गये हैं. इन प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन श्रंगार और संध्याकालीन आरती की तस्वीर सोसल मीडिया पर अपलोड किया जाता है. जिससे भक्त घर बैठे बाबा का दर्शन कर रहे हैं.



बासुकीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित मुकेश झा कहते है कि मंदिर का पट आम श्रद्धालु के लिए बंद है. लेकिन तीर्थ पुरोहितों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रतिदिन सुबह में भव्य श्रृंगार और सांध्यकालीन आरती की जा रही है. श्रृंगार के लिए काफी समय मिलता है. इसलिए विभिन्न प्रकार के फूल, वेल्बपत्र से शिवलिंग को आकर्षक तरीके से सजाया जाता है. प्रतिदिन बाबा के अलग-अलग रूप बनाये जाते हैं. और सोशल मीडिया पर अपलोड कर भक्तों को दर्शन कराये जा रहे हैं.



भक्त पुरोहितों के प्रयास को सराह रहे हैं

स्थानीय भक्त रेशमा कश्यप कहती हैं कि कोरोना बंदी के पहले प्रतिदिन फौजदारी बाबा का पूजन, दर्शन करने जाती थी. लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं कर पा रही. हालांकि तीर्थ पुरोहितों द्वारा बाबा का भव्य श्रृंगार का फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करने के घर बैठे ही बाबा का दर्शन हो जा रहा है.

बासुकीनाथ मंदिर के बारे में कई मान्यताएं प्रचलित 

बासुकीनाथ मंदिर पर भक्तों की अटूट आस्था है. मान्यता है कि यहां त्वरीत न्याय मिलता है. इसलिए इसे फौजदारी दरवार भी कहा जाता है. समुद्र मंथन से भी बासुकीनाथ का इतिहास जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि समुद्र मंथन में मथनी का काम बिहार के बांका जिला स्थित मंदार हिल पर्वत से लिया गया था. जबकि रस्सी के रूप में जिस नाग सर्प का उपयोग हुआ था उनका निवास स्थान बासुकीनाथ था. बासुकीनाथ और मंदार हिल की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है. इसलिए इसे नागेश नाथ धाम भी कहते हैं. सावन के महीने में यहां एक महीने तक मेला लगता है. इस दौरान देश विदेश से श्रद्धालु पूजा करने आते हैं. राज्य सरकार द्वारा इस मेले को राजकीय मेला का दर्जा दिया गया है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि हेमंत सरकार 8 जून से बासुकीनाथ समेत राज्य के अन्य धार्मिक स्थलों को खोलने की इजाजत दे देगी.

रिपोर्ट- पंचम झा

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