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रूढ़िवाद को तोड़ते हुए बेटियों ने दी मां को मुखाग्नि, आर्थी को कंधा देने भी नहीं आए बेटे

News18 Jharkhand
Updated: October 16, 2019, 8:24 PM IST
रूढ़िवाद को तोड़ते हुए बेटियों ने दी मां को मुखाग्नि, आर्थी को कंधा देने भी नहीं आए बेटे
मां के शव को कंधा देने नहीं आए बेटे

मृतिका उमा देवी के दो बेटे जीवित हैं. बेटों ने अर्थी को कांधा देना तो दूर उल्टे कांधा देने वालों के कंधे से शव को गिरा दिया. वहां मौजूद लोगों ने बेटा के करतूत का डटकर विरोध किया.

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दुमका. हमारे देश में बहुत से लोगों को लड़के की चाहत है, इसका एक कारण ये मान्यता है कि बेटा ही  चिता को आग देता है. जरमुंड़ी प्रखंड के तेली टोला में दो बेटियों ने रूढ़िवादी परंपरा (Orthodox tradition) को तोड़ते हुए मां की अर्थी को कांधा देकर ना सिर्फ श्मशान तक पहुंचाया, बल्कि मुखाग्नि देकर संतान धर्म का निर्वहन किया. वह भी तब जबकि मृतिका उमा देवी के दो बेटे जीवित हैं. बेटों ने अर्थी को कांधा देना तो दूर उल्टे कांधा देने वालों के कंधे से शव को गिरा दिया. वहां मौजूद लोगों ने बेटे के करतूत का विरोध भी किया.

पति की मौत के बाद बड़ा बेटा जूदेव मां को प्रताड़ित करने लगा
अर्थी को कांधे पर रखकर श्मशान की ओर ले जाती ये है बुलु देवी और बेला देवी है. जिसने भी यह नजारा देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए. दरअसल दोनों बहनें मां उमा देवी की अर्थी को कांधा दे रही हैं. मृतिका उमा देवी के दो बेटा हैं. इसके बाबजूद बहन को मुखाग्नि देनी पड़ी. उमा देवी के 6 संतान है, जिसमें तीन बेटे और तीन बेटियां हैं. 20 वर्ष पहले पति की मौत हो गई. पति की मौत के बाद बड़ा बेटा जूदेव मां को प्रताड़ित करने लगा. दो भाइयों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन जूदेव के आगे किसी की नहीं चली. मझली बेटी बुलु देवी को पति ने छोड़ दिया. थक हार कर बुलु दो बेटे के साथ ससुराल छोड़ कर मायके आ गई. भाई को यह नागवार गुजरा.

आंगन में मां का शव पड़ा था और बेटे का इंतजार हो रहा था

बुलु, भाई का घर छोड़ जरमुंड़ी में किराए पर एक रूम लेकर रहने लगी. मां भी बुलु के साथ रहने लगी. मां की तबीयत खराब होने से लेकर मौत तक की सूचना बुलु ने सभी भाई बहनों को दी. दो बहनें तो आ गईं लेकिन भाई नहीं पहुंचा. आंगन में मां का शव पड़ा था और बेटे का इंतजार हो रहा था. जब बेटा अर्थी को कांधा देने नहीं पहुंचा तो बहनों को यह कदम उठाना पड़ा. लेकिन बड़े भाई को यह नागवार गुजरा और वो श्मशान के रास्ते में बहनों के साथ मारपीट करने लगा. बहन के कांधे से मां का शव जमीन पर गिर पड़ा. मौजूद लोगों ने इसका डट कर विरोध किया. तो बेटा भाग खड़ा हुआ और इस तरह बेटी के हाथों मां को मुक्ति मिली.
(पंचम कुमार झा की रिपोर्ट)

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First published: October 16, 2019, 8:24 PM IST
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