कोरोना के कहर पर आस्था भारी, व्रतियों ने दिया चैती छठ का पहला अर्घ्य

रविवार को चैती छठ का पहला अर्घ्य दिया गया.

रविवार को चैती छठ का पहला अर्घ्य दिया गया.

Chaiti Chhath: डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर रविवार को चैती छठ पूजा का पहला अर्घ्य पूरे विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ. कल सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व चैती छठ सम्पन्न होगा.

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रिपोर्ट- नितेश कुमार

दुमका. कोरोना (Corona) के कहर के बीच लोग पवित्रता के साथ चैती छठ (Chaiti chhath) मना रहे हैं. डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर रविवार को चैती छठ पूजा का पहला अर्घ्य पूरे विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ. कल सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व चैती छठ सम्पन्न होगा. छठ व्रती शनिवार को खरना का प्रसाद ग्रहण कर पूजा प्रारंभ किया था.

शनिवार सुबह से ही व्रती अपने घरों में खरना में चढ़ने वाली खीर के लिए अरवा चावल का साफ कर पानी धोते दिखी. घर के सभी लोग एकजुट होकर पीतल की थाल में चावल को साफ करने बैठे और छठ की गीत गाकर भगवान सूर्य की उपासना की. शाम होते ही छठ व्रती अपने पूजा स्थान में लकड़ी का चूल्हा बनाकर गाय के दूध में चावल और गुड देकर खीर बनाने लगी. खीर बनने के बाद परवैतिन छठ मैया को प्रसाद चढ़ाकर खुद खायी. इससे पहले नियम-निष्ठा से नहाय-खाय से छठ व्रत प्रारंभ किया गया.

कोरोना वायरस को लेकर छठ व्रती घरों में ही तालाबनुमा पानी संचय की व्यवस्था कर अर्घ्य दिया. परवैतिन ने कहा कि छठ महापर्व चार दिनों तक उपवास के साथ कठिन नियम और संयम में रहना होता है. व्रती तमाम सुख सुविधा छोड़ सादगी के साथ इस व्रत को पूरा करती हैं.
माना जाता है कि छठ का व्रत करने वाली महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है और उनके सकुशल रहने का आशीर्वाद मिलता है। पुरुष भी अपनी मनोकामना पूर्ण होने के लिए छठ व्रत रखते हैं. इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए तालाब एवं नदी के छठ घाटों में पाबंदी प्रशासन द्वारा रोक लगाया गया है. छठ व्रती घरों में ही छठी मइया का पूजा और आराधना करते दिखी.
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