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भ्रष्‍टाचार का गजब खेल: सरकारी राशन दुकानदार ने दिया 840 किलो चावल, घर में नहीं रखने की जगह

भ्रष्‍टाचार का गजब खेल: सरकारी राशन दुकानदार ने दिया 840 किलो चावल, घर में नहीं रखने की जगह

Dumka News: दुमका के शिकारीपाड़ा प्रखंड में डाकिया योजना के तहत गड़बड़ी का मामला सामने आया है. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

Dumka News: दुमका के शिकारीपाड़ा प्रखंड में डाकिया योजना के तहत गड़बड़ी का मामला सामने आया है. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

Corruption in Dakiya Yojna: आदिम जनजाति को मुफ्त में अनाज उनके घरों तक पहुंचाने के लिए झारखंड सरकार डाकिया योजना चला रही है. इस योजना के तहत अनाज पहुंचाने के मामले में सरकार राशन के दुकानदार द्वारा घालमेल करने का मामला सामने आया है. सोशल ऑडिट में गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकारी राशन के दुकानदार ने दो परिवारों को एक साथ 840 किलो चावल दे दिया.

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    नितेश कुमार

    दुमका. झारखंड में भ्रष्‍टाचार का एक अजब खेल सामने आया है. सरकारी अनाज के वितरण में गड़बड़ पकड़े जाने पर सरकारी राशन के दुकानदार ने 2 लाभार्थियों को एक साथ ही 840-840 किलोग्राम चावल पहुंचा दिया. इसे देखकर राशन कार्डधारक खुश तो हो गए, लेकिन अब इतनी बड़ी मात्रा में मिले चावल को रखने की समस्‍या गहर गई है. आमतौर पर जनजातीय वर्ग क लोगों के घरों में इतनी बड़ी मात्रा में अनाज रखने की जगह नहीं होती है.

    यह मामला झारखंड की उपराजधानी दुमका के शिकारीपाड़ा प्रखंड का है. दरअसल, झारखंड के वित्‍त और खाद्य आपूर्ति मंत्री रामेश्‍वर उरांव ने आदिम जनजाति परिवारों के लिए चलाई जा रही ‘डाकिया योजना’ का सोशल ऑडिट कराने का आदेश दिया था. सोशल ऑडिट के दौरान दुमका के शिकारीपाड़ा प्रखंड में 2 आदिम जनजाति परिवारों (हरि देहरी और मोहन मांझी) को जनवितरण प्रणाली के तहत सरकारी राशन के दुकानदार द्वारा 2 साल से चावल न देने का मामला पकड़ में आया था.

    चोरी पकड़ी गई तो 2 साल का चावल एक साथ दिया
    सोशल ऑडिट में चोरी पकड़े जाने के बाद सरकारी राशन दुकानदार ने संबंधित दो आदिम जनजाति परिवारों को 840-840 किलोग्राम चावल पहुंचा दिया. दुकानदार ने दो साल से चावल नहीं दिया था. एक साथ इतना चावल मिलने के बाद हरि देहरी और मोहन मांझी की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. अब इसे रखने की समस्या पैदा हो गई है, क्योंकि गरीब आदिम जनजाति परिवारों की टूटी झोपड़ी में चावल रखने की जगह नहीं है.

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    सरकारी राशन के दुकानदार से पूछताछ
    शहरपुर पंचायत के ग्राम सालबोना पहाड़ में ऑडिट के दौरान जानकारी मिली कि गांव में मालपहाड़िया आदिम जनजाति के 70 परिवार रहते हैं. इनमें से दो परिवारों के राशन कार्ड गुम हो गए थे. इनके पास कार्ड का ब्योरा उपलब्ध था, लेकिन जनवितरण प्रणाली का दुकानदार दो साल से चावल नहीं दे रहा था. सोशल ऑडिट टीम ने दुकानदार से पूछताछ की.

    60% से अधिक परिवारों के घर तक नहीं पहुंचता है चावल
    दुमका जिले के सभी 10 प्रखंडों में जारी सोशल ऑडिट के दौरान इस बात की जानकारी मिली है कि 60 प्रतिशत से अधिक आदिम जनजाति परिवारों को डाकिया योजना के तहत घर तक चावल नहीं पहुंचाया जा रहा है. इस जिले में सोशल ऑडिट के दौरान 8,438 आदिम जनजाति परिवारों को शामिल करना है. अब तक 10 प्रखंडों के 6000 आदिम जनजाति परिवारों को ऑडिट के दौरान शामिल किया जा चुका है. 6000 परिवारों में से सिर्फ 2000 परिवारों को ही डाकिया योजना के तहत प्रति माह 35 किलो की दर से चावल पहुंचाया जा रहा है. बाकी को राशन लाने के लिए दुकान तक जाना पड़ता है.

    क्या है डाकिया योजना?
    भूख से आदिम जनजाति की मौत की खबर सामने आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने मुख्यमंत्री खाद्य सुरक्षा योजना की शुरुआत की थी. इसके तहत आदिम जनजाति परिवारों को प्रति माह 35 किलो अनाज मुफ्त में देने का फैसला किया गया था. राज्य में खाद्य सुरक्षा योजना लागू होने के बाद सभी आदिम जनजातियों को इसमें शामिल किया गया. आदिम जनजाति के लोगों के लिए दुकान जाकर चावल लेना कठिन और खर्चीला होता था, इसे देखते हुए ‘डाकिया योजना’की शुरुआत की गई. इसके तहत राज्य सरकार ने आदिम जनजातियों को घर तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था की है.

    Tags: Dumka news, Jharkhand news

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