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ek aisa gaon jahan ko nhin karna chahata hai apni beti ki shadi due to no road and basic facilities in the village bruk

झारखंड का एक ऐसा गांव जहां कोई नहीं ब्याहना चाहता है अपनी बेटी, यहां कुंवारे रह जाते हैं लड़के!

दुमका जिले के जामा प्रखंड के लकड़जोरिया गांव में कोई अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता हैं.

दुमका जिले के जामा प्रखंड के लकड़जोरिया गांव में कोई अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता हैं.

Jharkhand News: इस गांव के लोगों का कहना है कि कोई आदमी बेटी का ब्याह इस गांव में नहीं करना चाहता है. शादी के लायक उम्र हो जाने के बाद भी लड़के कुंवारे रह जाते हैं. शादी होगी, तो बारात भी गांव पैदल आना होगा.

हाइलाइट्स

इस गांव की उपेक्षा और बदहाली का आलम यह है कि लड़के कुंवारे रह जा रहे हैं.
इस क्षेत्र से वर्तमान में सीता सोरेन विधायक और सुनील सोरेन सांसद हैं.
गांव में बुनियादी सुविधाओं को अभाव है, पर कोई देखनेवाला नहीं है.

रिपोर्ट- नितेश कुमार 

दुमका. झारखंड दुमका जिले के जामा प्रखंड का एक गांव है लकड़जोरिया. इस गांव की उपेक्षा और बदहाली का आलम यह है कि लड़के कुंवारे रह जा रहे हैं. गांव में कोई अपनी बेटी ब्याहना नहीं चाहता. गांव की चारो ओर अच्छी सड़क तो है, पर गांव में प्रवेश करने के लायक सड़क नहीं है. न कोई कार ढंग से आ सकती है. न ही इमरजेंसी पड़ने पर एंबुलेंस, मोटरसाइकिल भी चलाना यहां आसान नहीं है.

बता दें, आदिवासी बाहुल्य लकड़जोरिया गांव में चार टोले हैं. इनमें लगभग 200 परिवार बसा हुआ है. आबादी 1200 से अधिक की है. इस क्षेत्र से वर्तमान में सीता सोरेन विधायक हैं और यह उनका तीसरा टर्म है. इसके बावजूद गांव की बदहाली से लोगों में जबरदस्त आक्रोश है. वर्तमान में दुमका लोकसभा के सांसद सुनील सोरेन का भी यही गृह क्षेत्र है. वे खुद भी जामा प्रखंड के ही रहने वाले हैं. इतना ही नहीं इस क्षेत्र की जनता ने जब बदलाव किया था, तब उन्हें ही अपना विधायक चुना था, लेकिन किसी ने इस लकड़जोरिया गांव की समस्या पर ध्यान नहीं दिया.

आज तक नहीं सेट की गयी पानी टंकी 

इस लकड़जोरिया गांव के प्रति सरकारी अनदेखी या लापरवाही की हद यह है कि दो वर्ष पूर्व यहां बोरिंग कर पानी टंकी लगाने का काम शुरू हुआ. टंकी लगाने के लिए स्ट्रकचर भी लगाया गया. लेकिन आज तक इस पर पानी की टंकी नहीं सेट की गयी. सवाल उठ रहे है कि आखिरकार इतनी बड़ी लापरवाही के प्रति किसी का ध्यान से क्यों नहीं गया.

खटिया के सहारे मरीजों को पहुंचाया जाता है अस्पताल 

लकड़जोरिया गांव पहुंचने का जो रास्ता है. वह पगडंडी नुमा है. कहीं दो फीट तो कहीं तीन फीट की कच्ची सड़क पगडंडी सी है. उसमें भी गड्ढे हैं. कहीं लोगों ने बड़े गड्ढे भरने के लिए पत्थर डाल रखे है. गांव में दूसरे वाहन की बात छोड़िए ट्रैक्टर तक नहीं आ पाता. समस्या उस वक्त होती है जब कोई बीमार पड़ता है और सड़क नहीं रहने से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाता. जो बीमार होते है. उसे खटिया पर टांग कर ले जाना पड़ता है.

चुनाव के दौरान आते हैं सांसद-विधायक 

ग्राम प्रधान रकीसल बेसरा ने कहा कि इस गांव में चार टोला है. गांव में बुनियादी सुविधाओं को अभाव है, पर कोई देखनेवाला नहीं है. सांसद-विधायक चुनाव के दौरान आते हैं. कहकर जाते हैं, लेकिन कभी समस्या दूर नहीं होती. गुड़ित बाबूजी मुर्मू कहते हैं कि सड़क ही नहीं बनी है. कोई आदमी बेटी का ब्याह इस गांव में नहीं करना चाहता है. शादी के लायक उम्र हो जाने के बाद भी लड़के कुंवारे रह जाते हैं. शादी होगी, तो बारात भी गांव पैदल आना होगा.

Tags: Dumka news, Jharkhand news

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