लाइव टीवी

इस गांव में महुआ पर टिकी है जिंदगी

Pancham kumar jha | News18 Jharkhand
Updated: April 2, 2018, 12:37 PM IST
इस गांव में महुआ पर टिकी है जिंदगी
इस गांव में महुआ पर टिकी है जिंदगी

इन ग्रामीणों के लिए महुआ नकदी का फसल माना जाता है. कड़ाके की धूप में जीतोड़ मेहनत कर महुआ चुनकर घर लौटने के बाद उसे सुखाकर बेचते हैं. 10 रूपया किलो की दर से व्यवसायी इनके घर आकर महुआ ले जाते हैं.

  • Share this:
उपराजधानी दुमका के काठीकुंड़ प्रखंड़ के बड़ा चापूड़िया गांव के लोगों की जिंदगी महुआ पर टिकी है. सुन कर थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन गांव के बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक की दिनचर्या की शुरूआत महुआ चुनने से ही शुरू होती है. इन ग्रामीणों के लिए महुआ नकदी का फसल माना जाता है.

विलुप्तप्राय आदिम जनजाति पहाड़िया से तालुक रखने वाले इन ग्रामीणों को सरकार द्वारा प्रतिमाह 35 किलोग्राम खाद्यान तो मिल जाता है लेकिन अन्य जरूरत की पूर्ति के लिए महुआ पर इन्हें आश्रित रहना पड़ता हैं.

कड़ाके की धूप में जीतोड़ मेहनत कर महुआ चुनकर घर लौटने के बाद उसे सुखाकर बेचते हैं. 10 रूपया किलो की दर से व्यवसायी इनके घर आकर महुआ ले जाते हैं.

वहीं इस गांव में दर्जनों ऐसे वृद्ध हैं जिन्हें एक साल पहले तक वृद्धावस्था का पेंशन मिलता था, लेकिन तकनीकि गलती से इनका पेंशन बंद हो गया.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दुमका से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 2, 2018, 12:35 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर