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दोस्त ने कहा- बूढ़ापहाड़ नक्सली हमले में शहीद हुए परमानंद जिंदादिल इंसान थे
Dumka News in Hindi

Pancham kumar jha | News18 Jharkhand
Updated: June 27, 2018, 3:26 PM IST
दोस्त ने कहा- बूढ़ापहाड़ नक्सली हमले में शहीद हुए परमानंद जिंदादिल इंसान थे
शहीद जवान की मां को सांत्वना देते शहीद परमानंद के मित्र

शहीद परमानंद की शादी 2012 में हुई थी. वह काफी जिंदादिल इंसान थे. एक सप्ताह पूर्व ही मां के पैर टूटने की खबर सुनकर वह घर आए थे. मां का इलाज कराने के बाद वह वापस काम पर लौट गए थे.

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लातेहार के बूढ़ापहाड़ में नक्सली द्वारा लैंड माइंस विस्फोट में शहीद हुए जवानों में एक जवान परमानंद चौधरी दुमका के रहने वाले थे. परमानंद की शहादत की खबर सुनते ही नगर थाना क्षेत्र के रघुनाथगंज मुहल्ले में मातमी सन्नाटा पसर गया. शहीद के विधवा मां का रो रो कर बुरा हाल है. पत्नी की आंखों के आंसू सू्ख चुके हैं जबकि दो वर्ष की इकलौती बेटी को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर क्यों उसकी दादी और मां रो रही हैं. बच्ची कभी दादी को देख रही है तो कभी मां को.

शहीद परमानंद की शादी 2012 में हुई थी. वह काफी जिंदादिल इंसान थे. एक सप्ताह पूर्व ही मां के पैर टूटने की खबर सुनकर वह घर आए थे. मां का इलाज कराने के बाद वह वापस काम पर लौट गए थे.

दुमका में रहने वाले शहीद परमानंद के मित्र चंडी प्रसाद यादव ने कहा कि वह एक जिंदादिल इंसान थे. एक सप्ताह पूर्व ही हमलोगों ने यहां साथ में खाना खाया था. उन्होंने कहा कि उनके ऑफिस में ही परमानंद ने बीमा कराया था. उन्होंने बताया कि जब उनके पास बीमा से संबंधित कागजात नहीं आए थे तब वह काफी परेशान लग रहे थे. ऐसा लग रहा था कि उनकी पहले से ही कुछ तैयारी चल रही है. उन्होंने कागजात पाने के लिए मुझे काफी परेशान किया. हमने उनके कागजात हेड ऑफिस रांची से मंगवाया.

उन्होंने कहा कि अभी एक सप्ताह पहले ही हम सभी दोस्तों ने मिल बैठकर एक साथ खाना खाया था. परमानंद पूरी तरह संतुष्ट होकर काम पर लौटे थे. जवान परमानंद के शहीद होने की खबर मिलने के बाद पुलिस महकमा ने शहीद के घर पहुंचकर उनके परिजनों को सांत्वना दी.

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First published: June 27, 2018, 3:26 PM IST
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