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दो साल से बन रहा है मॉडल स्कूल, एक कमरे में चलती है 3 कक्षाएं!
Dumka News in Hindi

Prabhanjan kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: February 20, 2018, 7:38 PM IST
दो साल से बन रहा है मॉडल स्कूल, एक कमरे में चलती है 3 कक्षाएं!
मॉडल स्कूल का निर्माण अधूरा

दो साल से बच्चे मॉडल स्कूल के भवन को देख तो रहे हैं लेकिन उसमें पढ़ाई करने के लिए नही जा सकते. अब स्कूल के बच्चों ने तीन कमरों और तीन कक्षाओं के साथ बैठकर पढ़ना सीख लिया है. शायद बच्चों के भविष्य के लिए सरकार की ओर से कोई जिम्मेदारी नहीं बनती.

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घाटशिला में बन रहे मॉडल स्कूल का निर्माण दो साल से अधूरा पड़ा है. राज्य सरकार ने मॉडल स्कूल के लिये करोड़ों की लागत से विद्यालय भवन का निर्माण करवाया, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते स्कूल भवन का निर्माण नहीं हो रहा है. स्कूल भवन निर्माण कार्य के संवेदक का कहना है कि फंड की कमी के कारण भवन का निर्माण पूरा नहीं हो रहा है. मॉडल स्कूल के लिए बनाया गया नया भवन करीब दो साल से अधूरा पड़ा है. विभाग के अधिकारी भी इसको लेकर मौन है. यह स्कूल भवन अब संवेदक के गोदाम के रूप में काम में लिया जा रहा है.
जब स्कूल का ही भविष्य तय नहीं तो बच्चों का कैसे होगा?

स्कूलों में बच्चों का सर्वांगीण विकास होता हैं लकिन जब ये स्कूल ही दम तोड़ने लगे तो बच्चों का भविष्य कहां तक टिक पाएंगे. घाटशिला में सरकार के इस मॉडल स्कूल के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं. इस मॉडल स्कूल में ना शिक्षक है ना ही पुस्तक, ना ही भवन है और ना ही शेक्षणिक संसाधन. झारखंड सरकार ने घाटशिला में बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा देने के लिए मॉडल विद्यालय बनाया है. कक्षा 6 से 10 तक के बच्चों के लिए बना यह मॉडल स्कूल अब बदहाली के आंसू रो रहा है.

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एक कमरे में पढ़ती हैं तीन कक्षाएं

इस मॉडल स्कूल में पढ़ रही छात्रा का कहना है कि यहां अध्यापकों की कमी है जिसके कारण सेलेबस कभी पूरा नहीं होता. छात्रा ने बताया कि एक ही कमरे में तीन कक्षाओं को साथ बिठाया जाता है जिससे पढ़ाई नही होती. स्कूल के सहायक शिक्षक का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने में काफी दिक्कतें होती हैं, लेकिन फिर भी हम पूरा प्रयास करते हैं. उन्होने बताया कि स्कूल को मात्र 3 कमरे मिले हुए हैं जिसमें 6 से 10 तक की कक्षाओं को एडजस्ट करना काफी मुश्किल हो जाता है.



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आखिर कब खुलेगी सरकार की आंखें

स्कूल भवन की कमी को अब बच्चों ने तो अपना लिया है और इसी माहोल में पढ़ाई करने के लिए खुद को ढाल भी लिया है. कई बच्चे मॉडल स्कूल के नाम पर चल रहे इस विद्यालय में नामांकन कराने के बाद खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. आखिर शिक्षा विभाग की आंखें कब खुलेगी? सरकार कब बच्चों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ को समझेगी? इसके जवाब फिलहाल जानना नामुनकिन है.

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First published: February 20, 2018, 7:19 PM IST
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