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सिखों के कृपाण की तरह तीर-धनुष लेकर चलें आदिवासी- शिबू सोरेन
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News18 Jharkhand
Updated: January 17, 2020, 12:15 PM IST
सिखों के कृपाण की तरह तीर-धनुष लेकर चलें आदिवासी- शिबू सोरेन
शिबू सोरेन ने अपील की कि दो फरवरी को जेएमएम का 41 वां स्थापना दिवस सह झारखंड दिवस मनाया जाएगा. इस मौके पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में आदिवासी अपने पारंपरिक परिधान में ही शामिल हों.

शिबू सोरेन ने कहा कि सामाजिक नियम में बड़ी शक्ति होती है. अब आदिवासी अपने घरों में तीर-धनुष नहीं रखते, यह बड़ा दुखद है.

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दुमका. जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन (Shibu Soren) ने कहा कि तीर-धनुष (Arrow-Bow) आदिवासियों (Tribal) की पहचान है. और आदिवासी जब भी घरों से निकलें, अपने साथ तीर-धनुष लेकर चलें. ठीक उसी तरह जिस तरह से सिख अपनी पगड़ी और कृपाण साथ रखते हैं. शिबू सोरेन दुमका में पार्टी के प्रमंडलीय बैठक को संबोधित कर रहे थे.

शिबू सोरेन ने अपील की कि दो फरवरी को जेएमएम का 41 वां स्थापना दिवस सह झारखंड दिवस मनाया जाएगा. इस मौके पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में आदिवासी अपने पारंपरिक परिधान में ही शामिल हों. उन्होंने कहा कि सामाजिक नियम में बड़ी शक्ति होती है. अब आदिवासी अपने घरों में तीर-धनुष नहीं रखते, यह बड़ा दुखद है.

जेएमएम के 41वें स्थापना दिवस मनाने की तैयारी 



गुरुवार को दुमका के ऑफिसर्स क्लब में जेएमएम की प्रमंडलीय बैठक संपन्न हुई. इस बैठक में पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन, राजमहल सांसद विजय हांसदा, विधायक स्टीफन मरांडी, नलीन सोरेन, हाजी हुसैन अंसारी, लोबिन हेम्ब्रम, बसंत सोरेन सहित कई नेता शरीक हुए. बैठक में संताल परगना प्रमंडल के सभी 6 जिलों से काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता पहुंचे. इस दौरान 2 फरवरी को शहर के गांधी मैदान में आयोजित होने वाले जेएमएम के 41वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने पर विचार विमर्श किया गया.



बैठक के बारे में जानकारी देते हुए विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि सत्ता में आने के बाद जिम्मेदारी और बढ़ गयी है. 40 वर्षों से यह कार्यक्रम दो फरवरी को आयोजित होता रहा है. शिबू सोरेन ने कहा कि सभी जिलों से अधिक से अधिक कार्यकर्ता स्थापना दिवस कार्यक्रम में शरीक हो, यह सुनिश्चित किया जाए.

स्थानीय नीति पर शिबू से अलग स्टीफन के विचार 

स्थानीय नाीति पर शिबू सोरेन के बयान पर जेएमएम विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि लोगों के अंदर भ्रम की स्थिति हो गयी है. कट आफ ईयर कोई मायने नहीं रखता. उन्होंने कहा कि संताल परगना में 1932 है, तो छोटानागपुर में 1964 है. जेएमएम शुरू से ही खतियानी रैयत की बात कह रही है. बता दें कि दो दिन पहले धनबाद में शिबू सोरेन ने कहा कि सूबे में 1932 के खतियान के आधार पर नई स्थानीय नीति बनेगी. जिसके बाद सियासी पारा चढ़ गया था.

रिपोर्ट- पंचम झा

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First published: January 17, 2020, 12:07 PM IST
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