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7 फरवरी से शुरू होगा राजकीय हिजला मेला, पढ़ें सखुआ के पेड़ से इस मेले का क्या है कनेक्शन

News18 Jharkhand
Updated: January 20, 2020, 3:08 PM IST
7 फरवरी से शुरू होगा राजकीय हिजला मेला, पढ़ें सखुआ के पेड़ से इस मेले का क्या है कनेक्शन
हर साल एक सप्ताह तक चलने वाले हिजला मेले में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. (फाइल फोटो)

एसडीओ राकेश कुमार ने बताया कि इस मेले में एक सप्ताह तक आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी. इस वर्ष मेले की शुरुआत 130 पौधे लगाकर की जाएगी. मेलाक्षेत्र को पॉलिथिनमुक्त रखा जाएगा.

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दुमका. जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर पर स्थित हिजला गांव में हर साल राजकीय हिजला मेला (Hijla Fair) लगता है. मयूराक्षी नदी (Mayurakshi River) के तट पर लगने वाले इस मेले की शुरुआत साल 1890 में अंग्रेज अफसर आर कर्सटन ने की थी. संथाल (Santhal Tribal) समुदाय के लिए इस मेले का विशेष धार्मिक महत्व है. पहले इसका नाम हिज लॉ (HIS LAW) था, लेकिन धीरे-धीरे हिजला हो गया. साल 2015 में इस मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिया गया.

ये है हिजला मेले का इतिहास 

सामाजिक कार्यकर्ता सच्चिदानंद सोरेन ने बताया कि साल 1890 से पहले मेले वाले स्थल पर एक विशाल सखुआ का पेड़ था. उसके नीचे स्थानीय लोग इकट्ठा होते थे और किसी भी मुद्दे के समाधान के लिए पंचायत होती थी. लेकिन अंग्रेज कमीश्नर आर कर्सटन को लगा कि स्थानीय लोग इकट्ठा होकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बना सकते हैं. भीड़ एकत्रित ना हो, इसलिए उन्होंने सखुआ का पेड़ कटवा दिया. उस वर्ष संथाल परगना क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ गया. आदिवासी समुदाय के लोगों ने ब्रिटिश कमीश्नर को अकाल का कारण पेड़ काटना बताया और उस स्थल पर पंचायत की पुरानी परंपरा को बहाल रखने देने का आग्रह किया.

हिजला मरांग बुरू के नायक सीताराम सोरेन के मुताबिक आदिवासियों के आग्रह पर कर्सटन ने साल 1890 में यहां हिज लॉ के नाम से मेले की शुरूआत की. कटे हुए सखुआ पेड़ के अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं. यह संथाल समुदाय के देवता मरांग बुरू के नाम से जाना जाता है. इसकी पूजा संथाल समुदाय के लोग करते हैं.

रघुवर सरकार ने दिया राजकीय मेले का दर्ज 

वर्ष 2015 में राज्य की रघुवर सरकार ने इस ऐतिहासिक मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिया. 7 दिनों तक चलने वाला हिजला मेला प्रत्येक वर्ष फरवरी महीना के शुक्ल पक्ष में शुक्रवार को शुरू होता है. इस वर्ष 7 फरवरी से इसकी शुरूआत होगी. मेला को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है.

एसडीओ राकेश कुमार ने बताया कि इस मेले में एक सप्ताह तक आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी. इस वर्ष मेले की शुरुआत 130 पौधे लगाकर की जाएगी. मेलाक्षेत्र को पॉलिथिनमुक्त रखा जाएगा. मेले में झारखंड के अलावा सात राज्यों के स्टाल लगाये जाएंगे. मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा मिले, इसके लिए जिला प्रशासन का प्रयास जारी है.राजकीय मेला का दर्जा पा चुके हिजला मेले की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल हुई है. मेले के दौरान एक सप्ताह तक यहां प्रत्येक दिन विभिन्न कलामंचों से आदिवासी संस्कृतियों की झलक देखने को मिलती है. यह स्थल आदिवासियों के लिए विशेष धार्मिक महत्व का है.

रिपोर्ट- पंचम झा

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First published: January 20, 2020, 3:08 PM IST
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