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Dumka News: बाल विवाह का किया था विरोध, ग्रामीणों ने पंचायत लगाकर गांव निकाला दे दिया

Dumka News: बाल विवाह का विरोध करने वाले शख्‍स को पंचायत लगाकर गांव से बाहर निकाल दिया. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Dumka News: बाल विवाह का विरोध करने वाले शख्‍स को पंचायत लगाकर गांव से बाहर निकाल दिया. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Jharkhand News: वसारद अंसारी ने तकरीबन 9 साल पहले अपनी नाबालिग भतीजी की शादी का विरोध किया था. घर लौटने पर ग्रामीणों ने पंचायत लगाकर उन्‍हें गांव निकाला दे दिया. अब वह एसपी ऑफिस में आकर न्‍याय की गुहार लगा रहे हैं.

  • News18Hindi
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    नीतेश कुमार

    दुमका. हाथों में कागज लिए दुमका एसपी ऑफिस में घूमता शख्‍स देखने में तो साधारण सा लगता है, पर काम बड़ा ही हिम्मत का किया है. सामाजिक कुरीतियों का बहिष्कार करना और सच बताना इस शख्‍स को काफी महंगा पड़ गया है. ग्रामीणों ने पंचायत लगा कर इन्‍हें गांव से निकाल दिया. इनका कसूर सिर्फ इतना था कि इन्‍होंने लड़कियों की शिक्षा और बाल विवाह पर बात की थी. 21वीं सदी के भारत की यह घटना चौंकाने वाली है.

    यह मामला दुमका जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मुड़भंगा पंचायत के चिरुडीह गांव का है. समाज को सही रास्‍ता दिखाने की हिम्‍मत करने वाले वसारद अंसारी को ही सामाजिक बहिष्‍कार का सामना करना पड़ रहा है. इन्‍होंने बाल विवाह का विरोध किया था. वसारद ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा की बात की थी. इससे समाज के ठेकेदार इतने नाखुश हुए किए पंचायत लगाकर तुगलकी फरमान सुनाया और वसारद को गांव से निकाल दिया. आरोपियों ने इनका सामान भी घर से बाहर फेंक दिया. फिलहाल वसारद अपने बच्चे और परिवार के साथ अपनी बहन के घर में रह रहा है. वह घर वापसी के लिए दुमका एसपी से गुहार लगा रहे हैं.

    वसारद की मानें तो वर्ष 2012 में उन्‍होंने अपनी नाबालिग भतीजी की शादी का विरोध किया था. उन्‍होंने परिवारवालों से कहा था कि यह अभी बच्ची है, उसे कम से कम मैट्रिक तक पढ़ने दीजिए. किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. इसके बाद वसारद ने चाइल्ड हेल्पलाइन में इसकी शिकायत कर दी. चाइल्‍ड हेल्‍पलाइन के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और शादी रुकवाई थी. वसारद ने बताया कि इसके दूसरे दिन ग्रामीणों ने उनकी भतीजी की शादी करवा दी. उन्‍होंने बताया जब वह दिल्ली से 6 महीना पहले वापस अपने गांव आए तो उनके भाई ने उन्‍हें घर में घुसने नहीं दिया. ग्रामीणों ने पंचायत लगया और 2012 की घटना की बात करने लगे. वसारद ने ग्रामीणों से माफी भी मांगा और आइंदा ऐसी गलती न करने की बात भी कही. उन्‍होंने पंचों से सिर्फ एक आग्रह किया कि उन्‍हें एक मौका दिया जाए कि गांव में जब ऐसी बच्चियों की शादी हो जिसने मैट्रिक न की हो तो वह उनके माता-पिता को समझा सकें.

    इससे पंचायत में बैठे लोग और भी नाराज हो गए और कहा कि यह आदमी (वसारद) बहुत खुराफात है. इसका गांव में रहना ठीक नहीं है. इसके बाद वसारद को गांव निकाला दे दिया गया. दूसरा पक्ष वसारद के बड़े भाई शेखावत अंसारी का कहना है कि घर में रहने को लेकर छोटे भाई से झगड़ा-झंझट हुआ, जिसके बाद पंचायत बुलाकर सुलाह कराया जा रहा था, लेकिन वह नहीं माना. शेखावत ने दावा किया कि 2012 के बाद से बाल विवाह नहीं हुआ है.

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