बीजेपी सांसद ने बैलगाड़ी से गांव-गांव घूमकर कृषि कानूनों का किया प्रचार

बैलगाड़ी से घूम-घूम कर कृषि कानूनों का प्रचार करते सांसद विद्युत वरण महतो
बैलगाड़ी से घूम-घूम कर कृषि कानूनों का प्रचार करते सांसद विद्युत वरण महतो

पूर्वी सिंहभूम के सांसद विद्युत वरण महतो (Vidyut Varan Mahto) ने बैलगाड़ी पर बैठकर गांव-गांव का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने चौपाल लगाकर किसानों (Farmers) को कृषि कानूनों के बारे में विस्तार से बताया.

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जमशेदपुर. नये कृषि कानूनों (Agricultural Laws) को लेकर पूर्वी सिंहभूम के सांसद विद्युत वरण महतो (Vidyut Varan Mahto) ने बैलगाड़ी पर बैठकर गांव-गांव का दौरा किया. गांव-गांव में चौपाल लगाकर किसानों (Farmers) को कृषि कानून के बारे में विस्तार से बताया और जागरूक किया. एक देश एक बाजार के संदेश के साथ किसानों को झूठ से सावधान रहने का सुझाव सांसद ने दिया.

सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री किसानों के हित के लिये ही कृषि कानून बनाये हैं. इससे अब किसान अपनी फसल किसी भी राज्य में बेच सकते हैं. इसके साथ ही किसानों के लिये सरकारी सुविधा भी उपलब्ध रहेगी. एमएसपी भी लागू रहेगा.

उन्होंने बताते हुए कहा कि बहरागोड़ा के किसान साल में तीन बार धान की फसल उगाते हैं. लेकिन सरकार एक बार ही धान की खरीदारी करती है. बाकी गरमा धान किसानों को औने-पौने दामों में बेचना पड़ता है. लेकिन अब कृषि कानून होने पर इसी फसल को किसान अपनी मर्जी से बंगाल और ओडिसा तक की मंडी में जाकर बेच सकते हैं.




कृषि कानूनों को लेकर गांव- गांव में लगाये गये चौपाल में सांसद विद्युत वरण महतो, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सरोज महापात्रा, पोटका विधानसभा के भाजपा नेता राजू सरदार, दिनेश साव, बबलू प्रसाद, लखन मार्डी, सत्या तिवारी, साकेत अग्रवाल समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने भी किसानों को संबोधित किया. और कृषि कानूनों के बारे में विस्तार से किसानों को जागरूक किया.

पंजाब में किसानों का प्रदर्शन जारी 

बता दें कि पंजाब में नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का प्रदर्शन जारी है. जबकि केन्द्रीय मंत्री से लेकर भाजपा के नेता और सांसद इसका प्रचार करने में जुटे हुए हैं. प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि दिल्ली में किसान नेताओं के अपमान के विरोध में वे लोग 17 अक्टूबर को पूरे राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पतले फूंकेंगे.

दरअसल कृषि कानूनों के संबंध में केन्द्रीय कृषि सचिव के साथ बैठक के लिए बुधवार को दिल्ली पहुंचे किसान नेताओं ने जब बैठक में किसी केन्द्रीय मंत्री को नहीं देखा तो उठकर बाहर चले गए.
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