शिक्षा की ललक ऐसी कि जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं पूर्वी सिंहभूम के बच्चे

News18 Jharkhand
Updated: August 21, 2019, 6:19 PM IST
शिक्षा की ललक ऐसी कि जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं पूर्वी सिंहभूम के बच्चे
पूर्वी सिंहभूम में स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डालकर नाला पार करते हैं बच्चे

स्कूल के रास्ते में चौड़ा नाला पड़ता है. बच्चे इस नाले को पार कर स्कूल जाते हैं. इस दौरान डूबने और बहने का खतरा बना रहता है.

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पूर्वी सिंहभूम के गुडाबांधा में बच्चों को स्कूल जाने के लिए जान हथेली पर लेनी पड़ती है. खासकर बरसात के दिनों में खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. दरअसल स्कूल के रास्ते में चौड़ा नाला पड़ता है. वैसे तो इसमें सालोंभर पानी रहता है, लेकिन बरसात में यह लबालब हो जाता है. बच्चे इस नाले को पार कर स्कूल जाते हैं. इस दौरान उनके कपड़े भींग जाते हैं. लेकिन हौंसला कम नहीं होता. कतार में एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बच्चे नाले को पार करते हैं. छोटे बच्चों को शिक्षक गोद में उठाकर पार कराते हैं.

बच्चों को जंगली जानवरों का भी खतरा

कोडरूकोचा उत्क्रमित विद्यालय में पहाडी इलाके के पांच गांव, रामाताड़ी, पताड़ी, नामोलेपो, बाकड़ाकोचा, माझीजरा और कोडरूकोचा गांव के बच्चें पढ़ते हैं. स्कूल में 70 बच्चों का नामांकन है. इसके अलावा छोटे-छोटे बच्चे भी पढ़ने आते हैं. बच्चों के लिये स्कूल में तीन शिक्षक हैं. स्कूल की हालत यह है कि चारों तरफ कोई चाहरदीवारी नहीं है. इससे स्कूल में जंगली जानवरों के हमले का भय बना रहता है.

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सालों से इसी तरह नाला पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे


शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के लिए बरसात के तीन महीनों में स्कूल पहुंचाना जोखिम भरा होता है. ज्यादा बारिश होने पर कक्षा एक और दो बंद करना पड़ता है.

सालों बाद जागा प्रशासन

ग्रामीणों की गुहार पर अब प्रशासन ने इस नाले पर पुलिया बनाने का फैसला लिया है. वहीं घाटशिला विधायक लक्ष्मण टु़डू ने भी ग्रामीणों को इस बाबत भरोसा दिलाया है. विधायक के मुताबिक बरसात के बाद पुल निर्माण का काम शुरू होगा. गांववालों के मुताबिक सालों से बच्चे इसी तरह स्कूल जा रहे हैं.
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रिपोर्ट- प्रभंजन कुमार

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First published: August 21, 2019, 6:18 PM IST
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