ऑनलाइन पढ़ाई के लिए पहाड़ जैसी जद्दोजहद, 3000 फीट ऊंचाई चढ़ते हैं बच्चे
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ऑनलाइन पढ़ाई के लिए पहाड़ जैसी जद्दोजहद, 3000 फीट ऊंचाई चढ़ते हैं बच्चे
पहाड़ी की चोटी पर ऑनलाइन क्लास करते स्कूली बच्चे

रांगामाटिया गांव के मनीषा देवगम, डेलेक्यू देवगम, सरीता हांसदा, दुखीराम सोरेन समेत 10-15 बच्चे ऑनलाइन क्लास (Online Class) करने के लिये रोजाना 3 हजार फीट पहाड़ी (Hill) पर चढ़ते हैं. क्योंकि गांव में मोबाइल में नेटवर्क मिलता नहीं है.

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पूर्वी सिंहभूम. जिले के डुमरिया प्रखंड के बीहड़ इलाके में रहने वाले स्कूली बच्चों (Children) को ऑनलाइन पढ़ाई (Online Class) करने के लिये काफी जिद्दोजहद करनी पड़ती है. इन बच्चों में पढ़ने की घोर ललक है, लेकिन सुविधा के अभाव में इन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है. केंदुआ पंचायत के रांगामाटिया गांव में दम्पाबेड़ा प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए तीन हजार फीट पहाड़ी (Hill) पर चढ़ना पड़ता है. वजह ये है कि गांव में मोबाइल में नेटवर्क मिलता नहीं है.

 रोजाना 3 हजार फीट पहाड़ी पर चढ़कर करते हैं ऑनलाइन क्लास 

रांगामाटिया गांव के मनीषा देवगम, डेलेक्यू देवगम, सरीता हांसदा, दुखीराम सोरेन समेत 10-15 बच्चे ऑनलाइन क्लास करने के लिये रोजाना 3 हजार फीट पहाड़ी पर चढ़ते हैं. दरअसल इनदिनों लॉकडाउन में निजी या सरकारी स्कूल बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं. इन बच्चों के पिता के मोबाइल पर पढ़ाई के लिये प्रति दिन लिंक भेजा जाता है. साथ ही कहा जाता है कि सुबह दस बजे से 11 बजे तक क्लास होगी. इस दौरान बच्चों को ऑनलाइन रहना पड़ता है. पिता के मोबाइल पर पढ़ाई के लिये लिंक भेजे जाने पर बच्चे भी पढ़ाई के लिये पिता को तंग करते हैं. जिसके कारण पिता को मोबाइल नेटवर्क के लिये जंगल व पहाडों पर नेटवर्क की खोज करनी पड़ती है.



गांव में एक ही शख्स के पास एंड्रायड मोबाइल 



दम्पाबेडा गांव के रहने वाले बिरसिंह देवगम अपनी पुत्री की पढ़ाई के लिए मोबाइल नेटवर्क पाने को तीन हजार फीट दम्पाबेड़ा पहाडी पर चढ़ते हैं. बिरसिंह देवगम अपनी बच्ची के साथ- साथ गांव के अन्य बच्चों को भी पहाड़ी पर ले जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि गांव में मात्र वही एक शख्स हैं जिनके पास ही एंड्रायड फोन है. इसलिए गांव के सभी बच्चे एकसाथ स्कूल ड्रेस में उनके साथ पहाड़ी पर जाते हैं और ऑनलाइन क्लास करते हैं.

पहाड़ी की चोटी या अन्य ऊंचाई वाले स्थान पर मिलता है नेटवर्क

बिरसिंह देवगम सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं. उन्होंने इस लॉकडाउन में गांव के बच्चों को भी पढ़ाने का जिम्मा लिया है. वह प्रति दिन समय अनुसार बच्चों को लेकर पहाड़ी की चोटी पर जाते हैं और स्कूल के टीचर के द्वारा दिये गये लिंक से बच्चों को पढ़ाते हैं. बिरसिंह देवगम ने बताया कि आसपास के दर्जनों गांव में मोबाइल में नेटवर्क नहीं मिलता है. लेकिन पहाड़ी की चोटी पर या अन्य ऊचाई वाले स्थान पर जाने पर से मोबाइल का नेटवर्क मिलता है. गांव में अगर किसी को मोबाइल से बात करनी होती है, तो वह शख्स पहाड़ी पर जाकर ही बात करता है. रांगामाटिया गांव में मोबाइल का टॉवर लगा दिया जाए, तो इस समस्या का समाधान हो सकता है. लेकिन अबतक इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया.

रिपोर्ट- प्रभंजन कुमार

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