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40 हाथियों ने मचाया कोहराम, डर के मारे छत पर रात गुजारते हैं ग्रामीण

40 हाथियों ने मचाया कोहराम, डर के मारे छत पर रात गुजारते हैं ग्रामीण

 हाथियों के आंतक से गांववाले परेशान

हाथियों के आंतक से गांववाले परेशान

ग्रामीण भय के साये में जीते हैं. दिन के समय तो ग्रामीण किसी तरह हाथियों से लोहा ले लेते हैं. लेकिन रात में वे पक्के मकानों की छत पर चढ़कर अपनी जान बचाते हैं.

    पश्चिम बंगाल से सटे पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया में हाथियों ने उत्पात मचा रखा है. हाथियों के भय से ग्रामीण एकजुट होकर पक्के मकानों की छत पर रात बिताते हैं. जबकि दिन के समय में ग्रामीण जान हथेली पर लेकर हाथियों को भगाने का काम करते हैं.

    चाकुलिया के सीमावर्ती गांवों में 40 हाथियों के झुंड ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. खासकर रात के समय में ग्रामीण भय के साये में जीते हैं. उनके पास हाथियों को भगाने के लिये ना ही टॉर्च और ना ही पटाखे होते हैं. दिन के समय तो ग्रामीण किसी तरह हाथियों से लोहा ले लेते हैं. लेकिन रात में वे पक्के मकानों की छत पर चढ़कर अपनी जान बचाते हैं.

    इन हाथियों से निबटने के लिए वन विभाग की ओर से कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है. उधर हाथियों का झुंड गांव-गांव में घुम-घुम कर नुकसान पहुंचा रहा है. ढेंगाम गांव में हाथियों ने बालक नायक, कालीपद नायक, सुधीर नायक, परिमल नायक, मोहन नायक, महादेव नायक, कबीर नायक, पत्नी नायक समेत दर्जनभर लोगों के घरों को ध्वस्त कर दिया. फसल और बर्तनों को भी कुचलकर बर्बाद कर दिया.

    हाथियों के इस उपद्रव का बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि हाथियों के आने-जाने वाले रास्ते में कई तरह के व्यवधान उत्पन्न हो गये हैं. इससे हाथियों का झुंड रास्ता भटक कर गांव की ओर रुख कर लिया है और उत्पात मचाते फिर रहे हैं. दलमा से लेकर पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा तक फैले एलिफेंट कॉरिडोर में कई तरह के रोड़े उत्पन्न होने के कारण हाथियों का ये गुस्सा निकल रहा है.

    (प्रभंजन की रिपोर्ट)

     

    Tags: Ghatshila

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