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मौत के साये में पुलिस जवान, जर्जर भवन से चल रहा है थाना

मौत के साये में पुलिस जवान, जर्जर भवन से चल रहा है थाना

साल 2011 से जर्जर भवन से संचालित हो रहा है पुलिस थाना.

साल 2011 से जर्जर भवन से संचालित हो रहा है पुलिस थाना.

घाटशिला के गालूडीह सुवर्णरेखा परियोजना के भवन में गालूडीह थाना भवन बीते 2011 से चल रहा है. भवन की हालत इतनी जर्जर है कि छत टूट कर गिरने लगी है. जर्जर भवन में थाना चलाये जाने से सुवर्णरेखा परियोजना के अधिकारियों ने भी पहले से ही भवन गिराने, ध्वस्त करने की सूचना थाना को दे रखी है, लेकिन इसके बावजूद भी पुलिस थाना इसी जर्जर भवन से चल रहा है.

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    घाटशिला के गालूडीह सुवर्णरेखा परियोजना के भवन में गालूडीह थाना भवन बीते 2011 से चल रहा है. भवन की हालत इतनी जर्जर है कि छत टूट कर गिरने लगी है. जर्जर भवन में थाना चलाये जाने से सुवर्णरेखा परियोजना के अधिकारियों ने भी पहले से ही भवन गिराने, ध्वस्त करने की सूचना थाना को दे रखी है, लेकिन इसके बावजूद भी पुलिस थाना इसी जर्जर भवन से चल रहा है. जर्जर भवन में रहने वाले जवान कई बार अपना दर्द  वरिष्ठ पदाधिकारियों को बता चुके हैं पर अबतक कोई समाधान नहीं निकल रहा है.

    गालूडीह थाने में रहने वाले जवान बताते है कि उन्हें नक्सलियों और अपराधियों से कोई भय नहीं लगता है, डर लगता है तो थाना भवन से, कब सोए-सोए मौत आ जाए. जवान कहते हैं कि उनकी मौत वीरता के साथ होनी चाहिए, लेकिन वे कायरता के साथ थाना भवन के अंदर मरना नहीं चाहते है.

    जर्जर भवन के बारे में कई बार उच्च अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई विकल्प नहीं निकाला गया है. अगर समय रहते अगर गालूडीह थाना भवन को स्थानांतरण नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है.

    दिनभर ड्यूटी के बाद पुलिस के जवान रात के समय दो घंटे भी चैन से सो नहीं पाते हैं. समय-समय पर छत का टुकड़ा गिरते रहता है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो कभी भी बड़ी घटना घट सकती है.

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