एक साल से गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं लोग, प्रशासन को नहीं कोई सुध

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित घाटशिला में तमाम सुख-सुविधा के साधन मौजूद हैं, लेकिन यहां से कुछ ही किलोमीटर दूर एक गांव में सैकड़ों लोग गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं.

News18 Jharkhand
Updated: July 1, 2019, 4:59 PM IST
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Updated: July 1, 2019, 4:59 PM IST
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला में डुमरिया प्रखंड के कालीमाटी गांव के ग्रामीण पानी के लिए दर दर भटक रहे हैं. गांव में 14 चापाकल हैं, जिसमें से 11 खराब पड़े हैं. बीते एक साल से इस गांव में खराब चापाकल नहीं बनाए गए हैं. मजबूरन गांव के लोग जंगल में बने एक गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं.

घाटशिला के डुमरिया प्रखंड कालीमाटी गांव का डुगरी टोला, बाहादाहा टोला, रोहनीडीह टोला, खेलाडीपा टोला और सड़क टोला के लगभग 400 आबादी वाले गांव में कुल 14 चापाकल हैं, जिनमें 11 खराब पड़े हैं. तीन चापाकल से भी पानी बूंद-बूंद ही गिरता है, जिससे गांव के ग्रामीण जंगल के गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं.

प्रशासन बेसुध
ग्रामीण जंगल के समीप गड्ढा खोद कर चुआ (जब जमीन के अंदर से पानी का निकलने लगता है) बनाकर पानी पीते हैं. खराब चापाकल को लेकर ग्रामीणों ने कई बार मुखिया समेत प्रखंड कार्यालय को सूचित किया. लेकिन, अब तक चापाकल मरम्मत के लिए किसी ने कोई कदम नहीं उठाया. सुदूर और पहाड़ी इलाके का गांव होने के कारण यहां प्रखंड के अधिकारी या कर्मचारी भी कम ही आते हैं.

पानी के लिए कालीमाटी के पांच टोला के ग्रामीण जंगल में बने गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है. जंगल के पानी से भरने के कारण गड्ढा के पानी में कीड़े-मकोड़े आ जाते हैं और यह मटमैला हो जाता है. इसी पानी को वे घर लाते हैं.

पानी के अलावा सड़क भी प्रमुख समस्या
गांव से करीबन आधा किलोमीटर दूर जंगल और पहाड़ के समीप जहां पानी का स्रोत है, वहीं पर ग्रामीणों ने चुआ बनाया है. पहाड़ का पानी इसी गड्डे में जमा होता है. ग्रामीण उसी गड्ढे का पानी पीते हैं. गांव की वार्ड सदस्य सीता मुर्मू बताती हैं कि वह कई बार गांव के खराब चापाकल को लेकर मुखिया और प्रखंड कार्यालय में जानकारी दी, पर एक साल बीतने के बाद भी चापाकल को दुरुस्‍त नहीं किया गय है.
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गांव के ग्रामीणों को पानी के अलावा सड़क और बिजली की भी समस्या है. गांव में आज तक न ही मुखिया फंड और और न ही जिला फंड से सड़क बनया गया है. वर्षों पहले गांव में कच्ची सड़क का निर्माण किया गया था, जो अब पथरीली सड़क में तब्‍दील हो चुकी है.

(प्रभंजन कुमार की रिपोर्ट)

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First published: July 1, 2019, 11:45 AM IST
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