Teachers' Day: घाटशिला के इस शिक्षक के हौसले को आप भी करेंगे सलाम

News18 Jharkhand
Updated: September 5, 2019, 1:07 PM IST
Teachers' Day: घाटशिला के इस शिक्षक के हौसले को आप भी करेंगे सलाम
दोनों पैरों से दिव्यांग विदेशी गोप अपने स्कूल में छात्रों और दूसरे शिक्षकों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं

दोनों पैरों में दिक्कत के बावजूद विदेशी गोप पिछले 15 साल से स्वर्गछिड़ा प्राथमिक विद्यालय में बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं. ठंड हो या बरसात, विदेशी एक दिन भी स्कूल नहीं छोड़ते हैं.

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दिल में हौसला हो, तो बड़ी से बड़ी बाधा भी बौनी साबित हो जाती है. पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड में पदस्थापित दिव्यांग शिक्षक विदेशी गोप ने यह सच कर दिखाया है. दोनों पैरों में दिक्कत के बावजूद विदेशी गोप पिछले 15 साल से स्वर्गछिड़ा प्राथमिक विद्यालय में बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं. ठंड हो या बरसात, विदेशी एक दिन भी स्कूल नहीं छोड़ते हैं. टेबल पर चढ़कर वह बच्चों को पढ़ाते हैं. उनके इस हौसले को छात्रा- छात्राओं के साथ-साथ दूसरे शिक्षक भी सलाम करते हैं.

दिव्यांगता को बाधा नहीं बनने दिया

डुमरिया प्रखंड के स्वर्गछिड़ा गांव के रहने वाले दिव्यांग शिक्षक विदेशी गोप दोनों पैरों से लाचार हैं. लेकिन शिक्षा देने के रास्ते में उनके सामने यह कभी बाधा साबित नहीं हुई. विदेशी अपने दोनों हाथों से ही चलने से लेकर पढ़ाने तक का काम करते हैं. वर्ष 2004 में उन्होंने अपने गांव के प्राथमिक विद्यालय में पारा शिक्षक के रूप में योगदान दिया. तब से लेकर आज तक ठंड हो या बरसात एक दिन भी विदेशी गोप स्कूल से अनुपस्थित नहीं रहे. मौसम जैसे भी हो, वह स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाते हैं.

स्कूल के दूसरे शिक्षक बताते हैं कि विदेशी गौप का हौसला देखकर उन्हें प्रेरणा मिलती है.

छात्रों के लिए प्रेरणा बने विदेशी 

जन्म से दिव्यांग होने के बावजूद विदेशी गोप ने अपनी पढ़ाई पूरी की. उन्होंने कभी भी अपनी दिव्यांगता को अपनी मजबूरी नहीं बनने दिया. विदेशी टेबल-कुर्सी पर चढ़कर बच्चों को पढ़ाते हैं. ब्लैक बोर्ड पर बच्चों के प्रॉबलेम्स को सॉल्व करते हैं.

विदेशी कहते हैं कि उन्हें अपने इस काम में किसी की मदद लेना एकदम पसंद नहीं है. दिव्यांगता अब उनके लिए बाधा नहीं है. उन्होंने अपने हिसाब से अपनी जिंदगी को ढाल ली है.
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छात्र कहते हैं कि विदेशी गोप जैसे शिक्षकों से हमें प्रेरणा मिलती है. बाधाओं को जीतकर कैसे अपनी मंजिल को प्राप्त किया जा सकता है, इसके लिए हौसला मिलता है.

इनपुट- प्रभंजन कुमार

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First published: September 5, 2019, 1:06 PM IST
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