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वन भूमि पर ग्रामीणों द्वारा आवास बनाए जाने पर वारंट जारी

वन भूमि पर ग्रामीणों द्वारा आवास बनाए जाने पर वारंट जारी

वन विभाग के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर ग्रामीण

वन विभाग के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर ग्रामीण

झारखंड में पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला में वन भूमि पर ग्रामीणों द्वारा आवास बनाए जाने पर करीब 32 ग्रामीणों पर वारंट जारी कर दिया गया है.

    झारखंड में पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला में वन भूमि पर ग्रामीणों द्वारा आवास बनाए जाने पर करीब 32 ग्रामीणों पर वारंट जारी कर दिया गया है.

    लिहाजा, घाटशिला के मुसाबनी बेनाशोल गांव के ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे है. बता दें कि इस कड़ाके की ठंड में रात के अंधेरे में एक मोमबत्ती के सहारे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे महिलाओं और पुरुषों की जिंदगी कट रही है.

    क्या है पूरा मामला ?

    ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग द्वारा ग्रामीणों पर झूठा मामला दर्ज कर जेल भेजने की साजिश रची जा रही है. वन विभाग ने वर्ष 2013 में 32 ग्रामीणों पर पेड़ काटकर आवास बनाने का मामला दर्ज किया था, जिसपर घाटशिला न्यायालय से 32 लोगों के खिलाफ वारंट निकला है.

    ग्रामीणों ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनके रहने के लिए कोई आवास नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 32 साल से वे वन विभाग की जमीन पर आवास बनाकर रह रहे हैं. इसके तहत उन्होंने वन पट्टा के लिए वन विभाग को आवेदन भी दे रखा है, लेकिन वन विभाग ग्रामीणों की कोई सुध न लेकर जेल भेजने की तैयारी में है.

    मालूम हो कि एक तरफ जहां पूरे देश में पीएम आवास निर्माण को लेकर सरकार रात-दिन एक किए हुए, वहीं इन ग्रामीणों के साथ ऐसी ज्यादती की जा रही है.

    वहीं धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घाटशिला न्यायालय से 30 नवंबर तक का समय दिया गया है. प्रत्येक ग्रामीण को 42 हजार रुपए का फाइन जमा करना है. ऐसे में वे इतने रुपए कहां से लाएंगे.

    Tags: Forest department

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