Home /News /jharkhand /

कौन सुने इनका दर्द? इस ठंड में 143 परिवार हुए बेघर

कौन सुने इनका दर्द? इस ठंड में 143 परिवार हुए बेघर

आग के सहारे रात काटते ग्रामीण

आग के सहारे रात काटते ग्रामीण

ग्रामीण साइना खातुन का कहना है कि बहुत परेशानी हो रही है. छोटे- छोटे बच्चे को लेकर कहां जाएंगे. ठंड में किसी तरह से आग के सहारे रात गुजारते हैं.

    झारखंड के घाटशिला में कड़ाके की ठंड में पूरा गांव खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर है. दरअसल पूरा कुतलूडीह गांव रेलवे की जमीन पर बसा हुआ है. लेकिन अब रेलवे ने थर्ड लाइन के लिए गांववालों को घर खाली करने का नोटिस दिया है. जिसके बाद गांव के 143 परिवार घर छोड़कर खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं.

    ग्रामीण साइना खातुन का कहना है कि बहुत परेशानी हो रही है. छोटे- छोटे बच्चे को लेकर कहां जाएंगे. ठंड में किसी तरह से आग के सहारे रात गुजारते हैं.

    40 साल से अधिक समय से कुतलूडीह गांव बसा हुआ है. लेकिन रेलवे के नोटिस ने इन्हें झटके में बेघर कर दिया. ग्रामीण कड़ाके की ठंड में परेशान और हताश हैं. हालांकि अनुमंडल प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि सभी परिवारों को किसी स्कूल भवन में शरण दी जायेगी. लेकिन अभी तक ये भी नहीं हो पाया है.

    ठंड से दो दिन पहले एक बच्चे की मौत हो गई. वहीं दर्जनभर ग्रामीण बीमार हैं. घाटशिला के विधायक ने इन 143 परिवारों में 40 कंबल बांटकर अपनी जिम्मेवारी पूरी कर ली. अगर इन परिवारों को ठंड से नहीं बचाया गया, तो कई लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं. सबसे अधिक परेशानी बच्चों को है. दिन तो किसी तरह धूप में कट जाता है, लेकिन रात काटना मुश्किल हो रहा है.

    (प्रभंजन कुमार की रिपोर्ट)

    ये भी पढ़ें- सांसद ने कहा- अब रोजगार के लिए लोगों को पलायन नहीं करना पड़ेगा

    घाटशिला: हाथियों के झुंड ने घर में घुसकर एक बुजुर्ग महिला को कुचला

     

    Tags: Ghatshila, Indian railway, Jharkhand news

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर