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झारखंड में शिक्षा का हालः गढ़वा के इस स्‍कूल में 1000 छात्राओं के लिए सिर्फ एक शिक्षक

झारखंड में शिक्षा का हालः गढ़वा के इस स्‍कूल में 1000 छात्राओं के लिए सिर्फ एक शिक्षक

Education News: रंका कन्‍या विद्यालय में 1 शिक्षक के कंधे पर 1 हजार छात्राओं को पढ़ाने की जिम्‍मेदारी है. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

Education News: रंका कन्‍या विद्यालय में 1 शिक्षक के कंधे पर 1 हजार छात्राओं को पढ़ाने की जिम्‍मेदारी है. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

Jharkhand Education System: गढ़वा जिले के रंका कन्‍या विद्यालय में एक शिक्षक के कंधे पर 1000 छात्राओं की पढ़ाई-लिखाई की जिम्‍मेदारी है. इस बाबत जिला शिक्षा विभाग को जानकारी दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. छात्राओं का कहना है कि वे बहुत दूर से पढ़ने आती हैं, लेकिन स्‍कूल में शिक्षकों की कमी के कारण उन्‍हें मायूसी होती है. अपना भविष्‍य अंधकार में दिखता है.

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    रिपोर्ट – चंदन कुमार कश्‍यप

    गढ़वा. झारखंड में स्कूली शिक्षा व्यवस्था कैसी है, गढ़वा जिले का एक स्कूल इसका ज्वलंत उदाहरण है. जिले के एक स्‍कूल की छात्राओं के भविष्य के साथ शिक्षा विभाग खिलवाड़ कर रहा है. यहां 1 शिक्षक के भरोसे लगभग 1000 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं. लगातार गुहार लगाने के बावजूद इस विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है. शिक्षकों की नियुक्ति न होने से ऐसे हालात पैदा हो गए हैं कि छात्राएं ही एक-दूसरे को पढ़ा रही हैं.

    सरकार का एक स्लोगन है कि एक बच्ची पढ़ गई तो सारी पीढ़ी तर गई! गढ़वा के एक सरकारी स्‍कूल में यह स्‍लोगन महज जुमला साबित हो रहा है. गढ़वा जिला का रंका प्रखंड कभी नक्सली इलाके के रूप में जाना जाता था. अधिकारी जल्दी कार्यालय नहीं आते थे, बाद के दिनों में हालात बदले और नक्सली समस्‍या काफी हद तक खत्‍म हो गई. इसी रंका प्रखंड में सल 1983 में एक स्‍कूल की स्‍थापना हुई थी. इस स्‍कूल का नाम कन्या उच्च विद्यालय रंका रखा गया. इस विद्यालय में करीब 1 हजार छात्राएं पढ़ती हैं.

    Jharkhand Education System

    झारखंड के पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री ने कन्‍या विद्यालय में जल्‍द ही शिक्षकों को नियुक्‍त करने का भरोसा दिया है.  (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

    बालिका शिक्षा के लिए खुला था विद्यालय

    रंका कन्‍या विद्यालय में कभी शिक्षकों की भरमार थी, लेकिन आज महज 1 शिक्षक के भरोसे 1000 छात्राओं का अध्यापन चल रहा है. इस विद्यालय की स्‍थापना बच्चियों के भविष्य को संवारने के लिए की गई थी, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण उस पर ग्रहण लग गया है. अब इस स्कूल में छात्राएं खुद एक-दूसरे को पढ़ाती हैं. विनीता कुमारी, आकांक्षा, सोनी 10वीं कक्षा की छात्राएं हैं. छात्राएं बताती हैं कि वे लोग पढ़ाई के लिए बहुत दूर से आती हैं, लेकिन शिक्षक न होने के कारण बहुत मायूसी होती है. छात्राओं का कहना है कि उनका भविष्‍य अंधकार में है.

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    समाजसेवी ले रहे हैं क्लास

    इस विद्यालय की दशा देखकर कुछ समाजसेवी अपना एक-एक घंटा दे रहे हैं, ताकि बच्चियां पढ़ सकें. स्कूल के शिक्षक बताते है कि मैं वेतनभोगी शिक्षक हूं और बिना वेतन का प्रधानाध्यापक हूं, ऐसे में मैं ऑफिसियल वर्क देखूं या क्लास लूं? इसके लिए मैंने हर क्लास में दो-दो मॉनिटर चुन लिए और उसी से पढ़ाई होती है. उन्होंने बताया कि शिक्षकों के लिए डीसी से लेकर शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी तक को पत्र लिख कर इसकी जानकारी दी गई , लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. इस मामले पर सूबे के पेयजल एवं स्वक्षता मंत्री ने स्‍कूल में जल्‍द से जल्‍द शिक्षकों की भर्ती करने की बात कही है.

    Tags: Education news, Jharkhand news

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