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गढ़वा: भू-अर्जन विभाग की लापरवाही से अमवार डैम में गेट लगाने का काम अटका, डूब जाएंगे 4 गांव

गढ़वा: भू-अर्जन विभाग की लापरवाही से अमवार डैम में गेट लगाने का काम अटका, डूब जाएंगे 4 गांव

यूपी के सोनभद्र जिले में बन रहे अमवार डैम से झारखंड के गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड के चार गांवों- भूमफोर, शुरू, फेफसा और परासपानी कला की पांच हजार की आबादी के डूबने का खतरा पैदा हो गया है

यूपी के सोनभद्र जिले में बन रहे अमवार डैम से झारखंड के गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड के चार गांवों- भूमफोर, शुरू, फेफसा और परासपानी कला की पांच हजार की आबादी के डूबने का खतरा पैदा हो गया है

Jharkhand News: सरकारी बाबुओं की वजह से कैसे करोड़ों-अरबों की योजनाएं मझधार में फंस गई हैं इसका प्रमाण यूपी के सोनभद्र जिले के अमवार में बन रहा डैम है. इसकी लागत करीब 2,400 करोड़ रुपये है जिसका काम लगभग पूरा हो चुका है, सिर्फ गेट लगाने का काम शेष रह गया है. लेकिन भू अर्जन कार्यालय गढ़वा के पदाधिकारियों एवं बाबुओं की लापरवाही की वजह से गेट नहीं लगाया जा रहा हैर

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गढ़वा. झारखंड के गढ़वा जिला की सीमा तीन राज्यों छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार से लगती है. इन दिनों यूपी के सोनभद्र जिले के अमवार में अरबों रुपये की लागत से डैम का निर्माण (Dam Construction) कराया जा रहा है. इस डैम से जहां यूपी को फायदा है. वहीं, झारखंड के गढ़वा (Garhwa) जिले के चार गांव पूरी तरह से डूब जाएंगे. अधिकारियों की लापरवाही से अब तक किसी भी रैयतों को मुआवजा (Compensation) नहीं मिल पाया है. जबकि यूपी और छत्तीसगढ़ की सरकारों ने अपने सभी रैयतों को मुआवजा दे दिया है. साथ ही यूपी सरकार (UP Government) ने गढ़वा के रैयतों के लिए भी करोड़ों रुपए भेजे हैं.

सरकारी बाबुओं की वजह से कैसे करोड़ों-अरबों की योजनाएं मझधार में फंस गई हैं इसके प्रमाण के रूप में उत्तर प्रदेश के अमवार में बन रहे डैम को देखा जा सकता है. झारखंड की सीमा से सटे यूपी के सोनभद्र जिले के अमवार में कनहर नदी पर बन रहे डैम की लागत करीब 2,400 करोड़ रुपये है. इसका काम लगभग पूरा हो चुका है, सिर्फ गेट लगाने का काम शेष रह गया है. लेकिन भू अर्जन कार्यालय गढ़वा के पदाधिकारियों एवं बाबुओं की लापरवाही की वजह से गेट नहीं लगाया जा रहा है.

चार गांवों की 5 हजार की आबादी के डूबने का खतरा

सीमावर्ती क्षेत्र होने की वजह से गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड के चार गांवों- भूमफोर, शुरू, फेफसा और परासपानी कला की पांच हजार की आबादी इस डैम के डूब क्षेत्र में आये हैं. डूब क्षेत्र के अंदर आनेवाले सभी ग्रामीणों को न सिर्फ मुआवजा देना है बल्कि उनका पुनर्वास कर दूसरे स्थान पर घर-जमीन देकर पूरी व्यवस्था के साथ बसाना भी है. इसके लिये यूपी सरकार ने प्रथम चरण में 70 करोड़ रूपये गढ़वा जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया है. बताया जा रहा है कि धुरकी प्रखंड के चार गांवों के अलावे झारखंड के वन क्षेत्र की कुल 799 एकड़ जमीन भी डूब रही है. डैम का निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही भू-अर्जन की कारवाई शुरू की गयी थी. डैम का निर्माण लगभग पूरा हो गया है, मगर शिथिल व लापरवाह कार्यप्रणाली की वजह से भू-अर्जन कार्यालय गढ़वा मुआवजा व पुनर्वास की स्थिति तय नहीं कर सका है.

भू-अर्जन कार्यालय गढ़वा की लापरवाही की वजह से सरकार को करोड़ों का चूना लग रहा है. जबकि नियम कहता है कि जब तक रैयतों को मुआवजा नहीं मिलता, उनके जमीन और घर का किराया भी सरकार को देना है. ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि हम लोगों को पूछने वाला कोई नहीं है, सरकार हम पर ध्यान नहीं दे रही है. इस संबंध में जिले के उपायुक्त राजेश कुमार पाठक ने बताया कि यूपी सरकार से मुआवजे के रुपये आये हैं, कुछ तकनीकी समस्या है लेकिन वो इसे दुरुस्त करवाने का जल्द का प्रयास करेंगे. वहीं, पलामू के आयुक्त जटा शंकर चौधरी ने कहा कि जल्द ही इस समस्या का निराकरण कर लिया जाएगा.

Tags: Compensation, Dam crack, Jharkhand news

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