जन्माष्टमी Spl: भगवान श्रीकृष्ण की अलहदा प्रतिमा देखनी हो, तो आइये गढ़वा

Naween Jha | News18 Jharkhand
Updated: August 23, 2019, 2:29 PM IST
जन्माष्टमी Spl: भगवान श्रीकृष्ण की अलहदा प्रतिमा देखनी हो, तो आइये गढ़वा
गढ़वा के बंशीधर मंदिर में 32 मन ठोस सोने की भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा है.

गढ़वा में दो सौ साल पुराने बंशीधर मंदिर (Banshidhar Mandir) में 32 मन ठोस सोने की प्रतिमा है, जो अपने आप में अद्वितीय और अलौकिक है. इस मंदिर को नगर उंटारी की राजमाता शिवमानी कुंवर ने बनवाई थीं.

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भगवान श्रीकृष्ण (God Krishna) के दर्शन के लिए लोग मथुरा और वृंदावन जाना पसंद करते हैं, लेकिन उनकी कुछ अलहदा प्रतिमा देखनी हो, तो झारखंड के गढ़वा का रुख कीजिए. यहां दो सौ साल पुराने बंशीधर मंदिर (Banshidhar Mandir) में 32 मन ठोस सोने की प्रतिमा है, जो अपने आप में अद्वितीय और अलौकिक है. इस मंदिर को नगर उंटारी की राजमाता शिवमानी कुंवर ने बनवाई थीं. 21 जनवरी 1828 को वसंत पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण  की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गयी थी.

खुदाई में मिली भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा

स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब दो सौ साल पहले नगर उंटारी की राजमाता शिवमानी कुंवर को भगवान कृष्ण का सपना आया. जिसके बाद पास के एक पहाड़ की खुदाई कराई गई. उसी खुदाई में भगवान श्री कृष्ण की ये प्रतिमा मिली.

banshidhar mandir
गढ़वा का बंशीधर मंदिर


लोगों की माने तो राजमाता उस प्रतिमा को अपने महल में स्थापित करना चाहती थीं. लेकिन पहाड़ से प्रतिमा को लेकर चला हाथी रास्ते में ही एक जगह पर बैठ गया. इसलिए प्रतिमा को उसी जगह पर स्थापित करना पड़ा. 21 जनवरी 1828 को वसंत पंचमी के दिन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गयी. और मंदिर बनवाया गया. तब से अब तक भगवान बंशीधर में लोगों की अगाध श्रद्धा है.

महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने भी किया है वर्णन

बंशीधर मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा की अलौकिकता की व्याख्या महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने भी अपनी यात्रा वृतांत में की है. वे यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले थे. उन्हें हिन्दी साहित्य का पितामह भी कहा जाता है. अपने जीवन काल में  महापंडित सांकृत्यायन ने यहां कुछ वक्त बिताया था.
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इस मंदिर के महत्व को ऐसे भी समझा जा सकता है कि आसपास के इलाके के लोगों की दिनचर्या इसी मंदिर की चौखट पर मत्था टेककर शुरू होती है. श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

राज्य सरकार ने बदला नाम

राज्य सरकार यहां के विकास के लिए प्रयासरत है. इस बाबत सरकार यहां दो बार बंशीधर महोत्सव का आयोजन करा चुकी है. नगर उंटारी का नाम बदल कर बंशीधर नगर कर दिया गया है.

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First published: August 23, 2019, 2:25 PM IST
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