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भानु प्रताप शाही: जेल से छूटकर सियासत में आए और मंत्री बने, ऐसा रहा है सफर

News18 Jharkhand
Updated: November 18, 2019, 3:12 PM IST
भानु प्रताप शाही: जेल से छूटकर सियासत में आए और मंत्री बने, ऐसा रहा है सफर
भानु प्रताप शाही मधु कोड़ा की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे. (फाइल फोटो)

साल 2003 में जेल से छूटने के बाद भानु प्रताप (Bhanu Pratap Shahi) ने राजनीति में कदम रखा और अपनी पार्टी नौजवान संधर्ष मोर्चा बनाई. 2005 में भवनाथपुर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते.

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गढ़वा. पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही (Former Minister Bhanu Pratap Shahi) इस बार बीजेपी (BJP) के टिकट पर भवनाथपुर से चुनाव लड़ रहे हैं. विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से ठीक पहले उन्होंने अपनी पार्टी नौजवान संघर्ष मोर्चा का विलय कराते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया. शाही मधु कोड़ा (Madhu Koda) की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं. उनपर आय से अधिक संपत्ति और दवा घोटाले के मामले चल रहे हैं. इस सिलसिले में वो जेल भी जा चुके हैं.

तत्कालीन मंत्री का घर उड़ाने के मामले में गये थे जेल 

भानुप्रताप शाही का जन्म गढ़वा जिले के केतार प्रखंड स्थित कधवन गांव में साल 1978 में हुआ. इनके पिता हेमेन्द्र प्रताप देहाती व माता राजकुमारी देवी के पांच संतान हैं. जिनमें शाही दूसरे नंबर के हैं. भानु प्रताप की प्रारंभिक शिक्षा भवनाथपुर और स्नातक की शिक्षा गढ़वा शहर में हुई. इनका नाम तब सुर्खियों में आया जब साल 2001 में तत्कालीन मंत्री रामचंद्र केशरी का घर बम से उड़ा दिया गया था. इस मामले में नक्सलियों की संलिप्तता सामने आई थी. और भानु प्रताप शाही पर भी मामला दर्ज हुआ था. जिसमें ये जेल भी गये थे.

मधु कोड़ा की सरकार में बने स्वास्थ्य मंत्री 

साल 2003 में जेल से छूटने के बाद भानु प्रताप ने राजनीति में कदम रखा और अपनी पार्टी नौजवान संधर्ष मोर्चा बनाई. 2005 में भवनाथपुर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते. मधु कोड़ा की सरकार में भानु प्रताप को स्वास्थ्य मंत्री बनने का मौका मिला. लेकिन 2009 का चुनाव हार गये. बतौर स्वास्थ्य मंत्री इन पर सेल के चिकित्सक विजय राम के साथ मारपीट करने का मामला दर्ज हुआ. सरकारी काम में बाधा डालना और हरिजन एक्ट के इस मामला में इन्हें जेल भी जाना पड़ा. बाद में आय से अधिक संपत्ति और दवा घोटाला में भी इनका नाम आया और जेल जाना पड़ा.

चुनाव से पहले थामा बीजेपी का दामन 

2014 का चुनाव भी भानु प्रताप अपनी पार्टी नौजवान संघर्ष मोर्चा के टिकट पर ही लड़े और जीतकर एक बार फिर विधायक बने. उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी अनंत प्रताप देव को हराया. लेकिन 2019 का चुनाव आते-आते भानु प्रताप खुद बीजेपी के हो गये. अपनी पार्टी का विलय कराते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि जो गलती उन्होंने पहले की, आगे वैसी नहीं होगी. भानुप्रताप को शामिल कराने को लेकर बीजेपी विपक्ष के निशाने पर रही.
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(रिपोर्ट- शैलेश कुमार)

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First published: November 18, 2019, 3:11 PM IST
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