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Single Use Plastic Ban: नक्सल प्रभावित क्षेत्र की महिलाएं बनाएंगी पत्तल और दोना, DC की पहल पर अब मिलेगा बड़ा बाजार

सिंगल यूज प्लास्टिक के बंद होने के फैसले को देखते हुए गढ़वा जिले के डीसी रमेश घोलप ने एक अनोखी पहल की शुरुआत की है.

सिंगल यूज प्लास्टिक के बंद होने के फैसले को देखते हुए गढ़वा जिले के डीसी रमेश घोलप ने एक अनोखी पहल की शुरुआत की है.

Single Use Plastic: सिंगल यूज प्लास्टिक के बंद होने के फैसले को देखते हुए गढ़वा जिले के डीसी रमेश घोलप ने एक अनोखी पहल की शुरुआत की है. इस अनूठी पहल के तहत डीसी रमेश घोलप नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं को पत्तल और दोना बनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे.

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रिपोर्ट- चंदन कुमार कश्यप 

गढ़वा. देश में सिंगल यूज प्लास्टिक के बंद होने के फैसले को देखते हुए गढ़वा जिले के डीसी रमेश घोलप ने एक अनोखी पहल की शुरुआत की है. इस अनूठी पहल के तहत डीसी रमेश घोलप नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं को पत्तल और दोना बनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे. इससे महिलाओं को रोजगार और पैसे तो मिलेंगे ही. साथ ही पत्तल और दोना के रूप में लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प भी मिलेगा. दरअसल गढ़वा उपायुक्त रमेश घोलप बीते दिनों जिले के अति नक्सल प्रभावितक्षेत्र भंडरिया पहुंचे. उनके साथ प्रशासनिक अमला भी था. इस दौरान प्रखंड अंतर्गत भंडरिया पंचायत के बंजारी गांव में पहुंच कर चौपाल लगाया, उन्होंने गांववासियों की समस्याएं सुनीं.
उपायुक्त विशेषकर उक्त क्षेत्र अंतर्गत जेएसएलपीएस के तहत बनाए गए विभिन्न स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से मिले और उनकी समस्याओं से रूबरू हुए. उन्होंने साल वृक्ष के पत्तों का उपयोग कर पत्तल और दोना बनाने के कार्य में जुटी विभिन्न स्वयं सहायता समूह की महिलाओं तथा अन्य ग्रामीण महिलाओं से इस कार्य को बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के तौर पर अपनाने को लेकर विचार- विमर्श किया.

महिलाओं के उत्थान के साथ-साथ प्लास्टिक का भी विकल्प 

उपायुक्त ने कहा कि उक्त कार्य के लिए महिलाओं को जिला प्रशासन की ओर से हर संभव मदद की जाएगी. मुख्यमंत्री भी जेएसएलपीएस की दीदीओं और राज्य की अन्य महिलाओं के उत्थान, उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने तथा आत्मनिर्भर बनाने की पहल के समर्थक हैं. उन्होंने कहा कि आप सभी को किस प्रकार से सरकारी सहयोग प्रदान किया जाए इस पर काफी समय से विचार किया जा रहा था. मेरा मानना था कि आप के उत्थान के लिए क्यों ना आप ही से सुझाव लिया जाए ताकि हमारी पुरानी कलाओं को जिंदा रखते हुए पेड़ के पत्तों से पत्तल और दोना बनाने के कार्य में लगी महिलाओं को बेहतर प्लेटफार्म दिया जा सके. अब आपके द्वारा बनाए गए पत्तल और दोनों आधे पौने दामों में नहीं बिकेंगे बल्कि इन्हें एक निश्चित दर पर होलसेल दुकानों में बेचा जाएगा.

सप्लाई-चेन के जरिए होलसेल बाजार में होगी बिक्री 
चौपाल में लोगों से मुखातिब होने के बाद उपायुक्त ने पेड़ के पत्तों से पत्तल और दोना बनाने के कार्य को वृहद पैमाने पर करने के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान करने तथा मशीन का अधिष्ठापन करने की बात कही. उन्होंने कहा कि पारंपरिक तौर पर इसका हाथ से निर्माण करने के साथ-साथ ही अब मशीन के माध्यम से भी आप इस कार्य को और तेजी से कर सकेंगे. उपायुक्त ने मौके पर उपस्थित पदाधिकारियों को इस कार्य के लिए उक्त क्षेत्र मशीन अधिष्ठापित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि पत्तल और दोने के निर्माण के बाद उसकी सप्लाई के लिए एक सप्लाई-चेन बनाया जाए, जिसकी मदद से होल-सेल के जरिए सही दाम पर इन्हें बाजारों में बेचा जा सके. उन्होंने कहा कि यदि आगे आपको और किसी अन्य प्रकार के सहयोग की आवश्यकता होगी तो इसके लिए जिला प्रशासन हमेशा तत्पर है.

Tags: Jharkhand Government, Jharkhand news, Single use Plastic

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