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133 साल पुराने इस मंदिर से नगर उंटारी को मिलती है पहचान, अब मिलेगा नाम

News18 Jharkhand
Updated: September 3, 2018, 1:07 PM IST
133 साल पुराने इस मंदिर से नगर उंटारी को मिलती है पहचान, अब मिलेगा नाम
नगर उंटारी का बंशीधर मंदिर

नगर उंटारी को पलामू की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है. यहां श्री बंशीधर मंदिर की स्थापना सन 1885 में हुई थी.

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गढ़वा के नगर उंटारी कस्बे का नाम अब बंशीधर नगर होने वाला है. इसके लिए केन्द्र ने मंजूरी दे दी है. ये नया नामकरण यहां स्थित बंशीधर मंदिर के नाम पर होगा. इस सौ साल पुराने मंदिर में बंशी बजाते हुए भगवान कृष्ण स्थापित हैं.

नगर उंटारी को योगेश्वर कृष्ण की भूमि कहा जाता है और यहां की पहचान बंशीधर मंदिर से ही है. इस मंदिर में प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मथुरा एवं वृन्दावन की तरह मनाई जाती है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहांं भगवान श्रीकृष्ण त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश, के रूप विराजमान हैं.

खूबसूरत वादियों के बीच स्थित नगर उंटारी उतरप्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार की सीमाओं को स्पर्श करता है. नगर उंटारी को पलामू की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है. यहां श्री बंशीधर मंदिर की स्थापना सन 1885 में हुई थी. किवंदतियों के मुताबिक राजा भवानी सिंह देव की विधवा शिवमानी कुंवर को जन्माष्टमी पर स्वप्न में भगवान श्री कृष्ण का दर्शन हुआ. जिसके बाद रानी के आदेश पर कनहर नदी के किनारे महुअरिया के निकट शिव पहाड़ी से श्रीकृष्ण की प्रतिमा लाकर नगर उंटारी में स्थापित किया गया और मंदिर का निर्माण कराया गया. मंदिर में वाराणसी से राधा की अष्टधातु की मूर्ति मंगाकर स्थापित कराया गया.

यहां भगवान श्रीकृष्ण शेषनाग के ऊपर कमल पर वंशीवादन करते विराजमान हैं. भूगर्भ में गड़े होने के कारण शेषनाग नजर नहीं आता. प्रतिमा को गौर से देखने पर पता चलता है कि यहां श्रीकृष्ण त्रिदेव के स्वरूप में स्थापित हैं.

(शैलेश कुमार की रिपोर्ट)

 

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First published: September 3, 2018, 1:04 PM IST
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