ओमान में फंसे झारखंड के 30 मजदूर, वीडियो जारी कर वतन वापसी की लगाई गुहार
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ओमान में फंसे झारखंड के 30 मजदूर, वीडियो जारी कर वतन वापसी की लगाई गुहार
गिरिडीह समेत बोकारो, हजारीबाग और कोडरमा जिले के 30 से ज्यादा मजदूर ओमान में फंस गये हैं.

पीड़ित परिवारों का कहना है कि कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में परिजन वहां चले गये. लेकिन अब वहां वे फंस गये हैं. ऐसे में राज्य और केन्द्र सरकार को उन्हें वापस लाने के लिए कुछ करना चाहिए.

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गिरिडीह. झारखंड के गिरिडील जिले के बगोदर प्रखंड के 18 मजदूर (Laborers) ओमान (Oman) की राजधानी मसकट में फंसे गये हैं. मजदूरों ने सोशल मीडिया के जरिये अपनी परेशानी घरवालों को बताई. मजदूरों ने वतन वापसी के लिए केन्द्र और राज्य सरकार (Government) से गुहार भी लगाई है. सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में मजदूरों ने बताया कि उन्हें सात महीने से वेतन नहीं दिया जा रहा है. जिसके चलते उन्हें रहने-खाने में भी परेशानी हो रही है. और वे लोग वतन भी नहीं लौट पा रहे हैं.

पीड़ित परिवारों का कहना है कि कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में परिजन वहां चले गये. लेकिन अब वहां वे फंस गये हैं. ऐसे में राज्य और केन्द्र सरकार को उन्हें वापस लाने के लिए कुछ करना चाहिए. परिवारवालों का कहना है कि एकबार ये मजदूर लौटकर घर आ जाएं, तो फिर कभी उन्हें बाहर जाने नहीं देंगे.

 



इन गांवों के रहने वाले हैं मजदूर 



माहुरी गांव के चार मजदूर- राजू पासवान, खूबलाल पासवान, विजय महतो और योगेन्द्र कुमार

बैंको गांव के पांच मजदूर- देवी लाल महतो, संतोष महतो, आलम महतो, चन्द्रिका महतो, टेकलाल महतो

औरा गांव के दो मजदूर- महेश महतो, राजेश कुमार

मुंडरो गांव के तीन मजदूर- सोहन लाल महतो, प्रदीप महतो, हेमलाल महतो

तुकतुको गांव के दो मजदूर- निर्मलर महतो, सोहन महतो

डुमरडेली गांव के एक मजदूर- डुमरचंद महतो

और कोसी गांव के दो मजदूर- गोविंद महतो और एक अन्य शामिल हैं.

बेरोजगारी के चलते पलायन 

बगोदर के भाकपा माले विधायक विनोद सिंह का कहना है कि बेरोजगारी बढ़ने की वजह से लोग रोजगार की तलाश में विदेश जाते हैं. जिले में मनरेगा की स्थित काफी खराब है. मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है. कई मजदूरों की विदेश में मौत तक हो जाती है. उनका शव लाने में तीन-चार महीने लग जाते हैं. राज्य में रोजगार को बढ़ावा दिये बिना पलायन को रोकना मुश्किल है.

जेएमएम विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का कहना है कि गिरिडीह जिला काफी पिछड़ा हुआ जिला है. यहां रोजगार के साधन नही हैं. इसलिए बाहर जाना, मजदूरों की मजबूरी बन गई है. हालांकि हेमंत सरकार राज्य में रोजगार बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है.

झारखंड के 30 मजदूरों के फंसे होने की सूचना

गिरिडीह समेत बोकारो, हजारीबाग और कोडरमा जिले के 30 से ज्यादा मजदूरों के फंसने की जानकारी है. ये सभी अच्छी कमाई की लालच में ओमान की राजधानी मसकट गए थे. साल 2017 में मजदूरों को टावर लाइन में काम दिलाने का झांसा देकर ओमान ले जाया गया. वहां पर ठेका मजदूर बना दिया गया. अब सात माह से वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है. इन मजदूरों ने विदेश मंत्रालय से वतन वापसी की गुहार लगाई है.

इनपुट- सुरेश कुमार

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First published: February 24, 2020, 3:32 PM IST
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