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झारखंड: न्यू गिरिडीह रेलवे स्टेशन पर चावल की सैकड़ों बोरियां भींगकर बर्बाद; मगर जवाबदेह कोई नहीं?

न्यू गिरिडीह स्टेशन पर भींगी हुई चावल की बोरियां.

न्यू गिरिडीह स्टेशन पर भींगी हुई चावल की बोरियां.

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हाइलाइट्स

भुखमरी पर पॉलिटिक्स हर दिन, मगर सच देखने को कोई नहीं तैयार!
न्यू गिरिडीह स्टेशन पर 500 क्विंटल चावल बारिश में भींगकर बर्बाद.
एफसीआई और भारतीय रेलवे, दोनों ने जिम्मेदारी लेने से मना किया.

रिपोर्ट- एजाज अहमद
गिरिडीह. बेंगाबाद प्रखंड के न्यू रेलवे स्टेशन में खुले आसमान के नीचे सैकड़ों बोरियां चावल भींगकर बर्बाद हो गई हैं. रेलवे और एफसीआई की लापरवाहियों के कारण जनता को मिलने वाला चावल अब कचरा बन गया है. यह स्थिति तब है जब भारत में भुखमरी एक बड़ी सच्चाई है. सबसे खास बात यह है कि 500 क्विंटल चावल बर्बाद हो गया, लेकिन इसकी जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं है.

बताया जाता है कि 27 सितंबर को दोपहर दक्षिण भारत से चावल लेकर कोई मारवाड़ी पहुंचे थे. चावल को बोगी से निकालकर एक जगह एकत्रित किया गया. इसे एफसीआई गोदाम ले जाना था. लेकिन, एफसीआई के कर्मचारियों व संवेदक अनाज को समय रहते गोदाम नहीं पहुंचाया और बारिश के पानी में भींगकर लगभग 500 क्विंटल से अधिक चावल बर्बाद हो गया.

बता दें कि इस रेलवे स्टेशन पर एफसीआई के चावल सड़ने की पहली घटना नहीं है. कुछ महीने पहले ही यहां पर 100 बोरा से अधिक सड़ा हुआ चावल ट्रेन से उतारा गया था. जिसके बाद मीडिया में खबर छपने के बाद अपनी नाकामी छिपाने के लिए संवेदक और एफसीआई के कर्मचारियों के अलावा रेलवे कर्मचारियों ने तमाम सड़े हुए अनाज को मिट्टी के अंदर गाड़ दिया था. इस बार भी सैकड़ों बोरा चावल विभाग की लापरवाही के वजह से बर्बाद हो गया है. खास बात यह है कि अब इसकी कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है.

इस मामले को लेकर एफसीआई गोदाम इंचार्ज संजय शर्मा ने कहा कि उनके पास जानकारी नहीं है कि इतनी मात्रा में अनाज सड़ा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर अनाज सड़ा हुआ है तो इसमें रेलवे विभाग और संवेदक की लापरवाही हो सकती है. अभी बारिश का मौसम है और रेलवे स्टेशन पर शेड नहीं बना है, जिसकी वजह से बारिश के पानी में अनाज भींग जाता है.

वहीं, स्टेशन सुपरिटेंडेंट संतोष सिंह ने बताया कि चावल की सभी बोरियां ट्रक से ले जाई गई हैं. भींगने की बात संज्ञान में नहीं है. चावल दक्षिण भारत के किसी राज्य से आया था, इसकी भी जानकारी मुझे नहीं है.

बहरहाल, एक ओर जहां देश में गरीबी, भुखमरी की बात होती है. गरीबों को मुफ्त दिए जाने वाले अनाज को लेकर राजनीति होती है और कहा जाता है कि सरकार पर बोझ है, वहीं सैकड़ों क्विंटल चावल का बर्बाद हो जाना बड़ा सवाल क्यों नहीं है?

Tags: FCI, Giridih news, Indian railway, Jharkhand news

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