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गिरिडीह प्रधान डाकघर में 16 करोड़ के घोटाले की सीबीआई जांच शुरू

गिरिडीह प्रधान डाकघर में 16 करोड़ के घोटाले को लेकर सीबीआई की टीम ने छानबीन की.

गिरिडीह प्रधान डाकघर में 16 करोड़ के घोटाले को लेकर सीबीआई की टीम ने छानबीन की.

झारखंड के चीफ पोस्टमास्टर जनरल अनिल कुमार ने कहा कि घोटाले के इस मामले में जांच चल रही है. साइट विजिट कर मोडस ऑपरेंडी का पता लगाया जा रहा है. जांच के बारे में ज्यादा बताना उचित नहीं है. अभी तक 16 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई है.

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    गिरिडीह. प्रधान डाकघर (Giridih head post office) में करीब 16 करोड़ के घोटाले (Scam) का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. बुधवार को सीबीआई (CBI), विजिलेंस और डाक विभाग की टीम जांच के लिए गिरिडीह पहुंची. टीम के अधिकारियों ने प्रधान डाकघर में अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों से इस सिलसिले में पूछताछ की. साथ ही दस्तावेजों को भी खंगाला. इस घोटाले में 8 से 10 लोगों की संलिप्तता फिलहाल सामने आई है.

    झारखंड के चीफ पोस्टमास्टर जनरल अनिल कुमार ने कहा कि घोटाले के इस मामले में जांच चल रही है. साइट विजिट कर मोडस ऑपरेंडी का पता लगाया जा रहा है. जांच के बारे में ज्यादा बताना उचित नहीं है. अभी तक 16 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई है.

    डाक विभाग के मुख्य सतर्कता अधिकारी बीपी सिंह ने कहा कि इस घोटाले के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी. फिलहाल जांच चल रही है. पासबुक वेरिफिकेशन का काम चल रहा है. इसलिए घोटाले की रकम आगे बढ़-घट सकती है. फिलहाल 8 से 10 लोगों की संलिप्तता सामने आई है. घोटाले की रकम बड़ी है, इसलिए सीबीआई को जांच का जिम्मा दिया गया है.

    क्या है मामला?

    साल 2019 में गिरिडीह प्रधान डाकघर में घोटाले का मामला प्रकाश में आया था. इस मामले को लेकर डाकघर के डाकपाल सोमनाथ मित्रा ने नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. प्राथमिकी में सहायक डाकपाल शशिभूषण कुमार, निलंबित सहायक डाकपाल मो. अलताफ व गिरिडीह टाउन उप डाकघर के उप डाकपाल बासुदेव दास को नामजद अभियुक्त बनाया गया था. प्राथमिकी में घटना की अवधि 3 अक्तूबर 2016 से 30 अगस्त 2019 बतायी गयी थी.

    डाकपाल मित्रा के मुताबिक गिरिडीह प्रधान डाकघर के अधीनस्थ विभिन्न उप डाकघरों में डिमांड ड्राफ्ट को प्राप्तकर उप डाकपाल उसके साथ संलग्न खाताधारियों के एकाउंट में वर्णित रकम को जमा करके डिमांड ड्राफ्ट प्रधान डाकघर गिरिडीह में नकदी प्रेषण के रूप में भेज देते थे. प्रधान डाकघर में ट्रेजरर उस डिमांड ड्राफ्ट को उप डाकपाल के डेली एकाउंट के मार्फत प्राप्त करते थे. ट्रेजरर द्वारा ही उस डिमांड ड्राफ्ट को बैंक से क्लीयर करके सरकारी खाते में जमा कर दिया जाता था. दोबारा उसी डिमांड ड्राफ्ट की रकम को गिरिडीह टाउन उप डाकघर में खुले खातों में प्रधान डाकघर गिरिडीह के सहायक डाकपाल (बचत बैंक काउंटर) के द्वारा व्यक्तिगत खातों में जमा कर दी जाती थी. परंतु शाम ट्रेजरी को भेजी जाने वाली फाइनल रिपोर्ट सहायक डाकपाल के काउंटर द्वारा नहीं भेजी जाती थी.

    एक ही ड्राफ्ट से दो बार निकासी

    डाकपाल ने प्राथमिकी में कहा था कि धोखा देकर एक ही डिमांड ड्राफ्ट को दोबारा व्यक्तिगत खाते में जमा कर दिया जाता था. यह रकम 11 करोड़ 64 लाख 38 हजार 635 रुपए तक पहुंच गई. व्यक्तिगत खाते में क्रेडिट की गयी ड्राफ्ट की राशि की निकासी गिरिडीह टाउन उप डाकघर के उप डाकपाल के मदद से की गयी.

    इनपुट- सुरेश कुमार

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