Crime: शिक्षक और बेटे के दोहरे हत्याकांड के दोषी को मिली आजीवन कारावास की सजा

गिरिडीह में बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के दोषी शाहिद को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

News18 Jharkhand
Updated: August 8, 2019, 10:04 AM IST
Crime: शिक्षक और बेटे के दोहरे हत्याकांड के दोषी को मिली आजीवन कारावास की सजा
गिरिडीह में बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के दोषी शाहिद को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.
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Updated: August 8, 2019, 10:04 AM IST
झारखंड के गिरिडीह जिले में बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के दोषी शाहिद को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. मामला गांडेय थाना के मंझिलाडीह का है. दरअसल, बीते 30 अप्रैल 2013 को आरोपियों ने दोनों पिता-पुत्र की हत्या कर दी थी. संबंधित मामले में 2 साल पहले 10 आरोपियों को अदालत ने सजा सुनाई थी. वहीं आरोपी शाहिद को पुलिस ने घटना के बाद 7 जून 2013 को गिरफ्तार किया था. आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया था, तब से वह जेल में है. बता दें कि मामले में जिला जज टू कुमार दिनेश की अदालत ने सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी करार आजीवन कारावास की सजा सुना दी.

10 हजार रुपए जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा

बता दें कि सुनवाई के लिए आरोपी को सेंट्रल जेल से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया. इस दौरान अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक मनोज कुमार सिंह और अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद पांडेय ने की जबकि बचाव पक्ष से अधिवक्ता रामाधार मिश्रा ने बहस की. वहीं अभियोजन पक्ष से मामले में 8 लोगों की गवाही पहले ही हो चुकी है.

क्राइम रिपोर्ट-crime report
10 हजार रुपए जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा (सांकेतिक तस्वीर)


वहीं बुधवार को सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और गवाहों की गवाही का अवलोकन करने के बाद अदालत ने दोहरे हत्याकांड मामले के आरोपी मो. शाहिद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. साथ ही 10 हजार रुपए जुर्माना देने का आदेश दिया है. वहीं मामले में 2 वर्ष पहले 10 अन्य आरोपियों को सजा मिल चुकी है.

मारपीट के बाद कार से कुचलकर की थी हत्या 

मिली जानकारी के मुताबिक सोची-समझी साजिश के तहत शिक्षक अब्दुल रउफ और बेटे जियाउद्दीन की हत्या की गई थी. शिक्षक अब्दुल रउफ के स्कूल में भवन निर्माण का फंड आया था, जिसे आरोपियों ने उस विद्यालय को बनाने की बात बोली थी, लेकिन शिक्षक ने विभाग का हवाला देते हुए उन लोगों को भवन बनाने से रोक मना कर दिया था. विवाद यहीं से शुरू हुआ था.
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अस्पताल ले जाने के दौरान मौत

बता दें कि 13 अप्रैल 2013 को उसके पिता अब्दुल रउफ और भाई जियाउद्दीन आरोपियों के साथ पंचायती के लिए अगली तारीख लेने के लिए शीतला गए थे. वहां से बाप-बेटे अपनी बाइक से वापस आ रहे थे. इस दौरान जैसे ही अहारडीह के पास वे पहुंचे तो आरोपियों ने टाटा सूमो से पीछा करते हुए बाइक को ओवरटेक कर रोका दिया. इसके बाद रॉड से उनकी जमकर पिटाई कर दी. इसके बाद आरोपियों ने उनके उपर गाड़ी चढ़ा दी. वहीं आसपास के लोगों की मदद से जब उन्हें धनबाद ले जाया जा रहा था, तो उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था.

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First published: August 8, 2019, 10:00 AM IST
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