गांव की छोरी को मिलेगा ब्रिटेन का अवार्ड, पढ़ें 14 साल की चंपा की कहानी

केवल 14 वर्ष की उम्र में ही चंपा पूरे जिले में चर्चित हो गई है. अब देश के बाहर ब्रिटेन में चंपा को पहचान मिलने वाली है. वहां की महारानी जल्द ही चंपा को डायना अवार्ड से सम्मानित करेंगी.

News18 Jharkhand
Updated: July 31, 2019, 1:42 PM IST
गांव की छोरी को मिलेगा ब्रिटेन का अवार्ड, पढ़ें 14 साल की चंपा की कहानी
चंपा कुमारी
News18 Jharkhand
Updated: July 31, 2019, 1:42 PM IST
गिरिडीह के गांवा प्रखंड के जमडार की रहने वाली चंपा कुमारी का चयन ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवार्ड के लिए हुआ है. चंपा कुमारी बाल विवाह और बाल मजदूरी के खिलाफ लगातार अभियान चलाती रही है. पहले वह खुद ढिबरा खदान में बाल मजदूर के रूप में काम करती थी. लेकिन कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन ने उसे बाल विवाह और बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान से जोड़ा. इसके बाद उसने काफी कम समय में अपने इलाके में इस अभियान को आगे बढ़ाया.

ब्रिटेन की महारानी करेंगी सम्मानित

चंपा ने बाल मजदूरी कर रहे कई बच्चों को स्कूल में दाखिला करवाया. कई बाल विवाह को रुकवाया. आज समाज में उसकी एक अलग पहचान है. केवल 14 वर्ष की उम्र में ही चंपा पूरे जिले में चर्चित हो गई है. अब देश के बाहर ब्रिटेन में चंपा को पहचान मिलने वाली है. वहां की महारानी जल्द ही चंपा को डायना अवार्ड से सम्मानित करेंगी. इस खबर के फैलते ही चंपा को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.

champa kumar
परिवार के साथ चंपा कुमारी


चंपा का कहना है कि जंगल के बीच बसे गांव की लड़की को ब्रिटेन का अवार्ड मिलना काफी बड़ी बात है. मां का कहना है कि पैसे के अभाव में हम चंपा को पढ़ा नहीं पा रहे थे. लेकिन उसने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है.

पहले खुद बाल मजदूर थी चंपा

गांवा के बीडीओ कुमार बंधु कच्छप का कहना है कि चंपा ने गांवा ही नहीं पूरे राज्य का नाम रौशन किया है. कैलाश चिल्ड्रेन फाउंडेशन के संदीप नयन का कहना है कि गांवा प्रखंड में बाल मित्र का काम चल रहा है. चंपा को काफी मशक्कत के बाद इससे जोड़ा गया. उसने बाल मजदूरी और बाल विवाह के खिलाफ बेहतर काम किया.
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चंपा की इस उपलब्धि से उसका परिवार और पूरा गांव उत्साहित हैं.

रिपोर्ट- सुरेश कुमार

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First published: July 31, 2019, 1:41 PM IST
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