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गोड्डा हादसा: जब आंखों के सामने अपनों को जमींदोज होते देखा

गोड्डा हादसा: जब आंखों के सामने अपनों को जमींदोज होते देखा

गोड्डा खदान हादसा के तीसरे दिन शनिवार को भी रेस्क्यू जारी है. जहां लगातार शवों की बरामदगी हो रही है, वहीं परिजनों और मजदूरों के अनुभव दर्द के दास्तां सुना रहे हैं.

    गोड्डा खदान हादसा के तीसरे दिन शनिवार को भी रेस्क्यू जारी है. जहां लगातार शवों की बरामदगी हो रही है, वहीं परिजनों और मजदूरों के अनुभव दर्द के दास्तां सुना रहे हैं.

    आंखों के सामने दफन खुशियां

    रामगढ़ के वारिस अपने दो भाइयों के साथ इस खदान में काम करते थे. हादसे में दोनों भाइयों को खो देने वाले वारिस जब घटना की कहानी सुनाते हैं तो अजनबियों के भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. बकौल वारिस, हादसे से ठीक पहले अपने डंपर पर वे मिट्टी लोड करा रहे थे, जबकि दोनों भाई मिट्टी अनलोड करा रहे थे.  तभी धंसान शुरू हुआ और भाई परवेज आंखों के सामने डंपर सहित जमीन डोज हो गए. उन्हें बचाने पास दौड़ने लगे तो लोगों ने रोक लिया.

    लाश तक नहीं मिली

    दूसरे भाई शकील की लाश बाद में मिली. पर परवेज की तो अब तक लाश भी नहीं मिली. आंखें पोछते वारिस कहते हैं कि मार्च में शकील की शादी होनी थी. रोज काम से लौटने के बाद तीनो भाई साथ खाते शादी की तैयारियों पर चर्चा करते थे. हादसे ने दो भाई छीन कर जिंदगी बेरौनक कर दी.

     

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