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कोरोना की मार: 200 की स्ट्रेंथ की कोचिंग चलाने वाले शिक्षक बेच रहे मंडी में आम

मंडी में आप बेच रहे शिक्षक.

कहते हैं कि अगर आप शिक्षित हैं तो आपको पेट पालने में मुश्किल नहीं होगी, लेकिन कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में सभी कहावतें फेल नजर आई हैं.

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    गौरव कुमार झा
    गोड्डा. लॉकडाउन में सबसे अधीक प्रभावी रहने वालों में शिक्षा जगत है. पिछले 2 वर्षों से स्कूल और कोचिंग संस्थान बन्द पड़े हैं कहा जा रहा है कि सरकारी स्कूल के शिक्षकों को तो उचित मानदेय महीना पूरे होते ही एकाउंट में क्रेडिट हो जा रहे हैं, पर इस आपदा की स्थिति में प्राइवेट स्कूल को संचालित करने वाले और कोचिंग संस्थान से अपनी रोजी रोटी चलाने वाले शिक्षकों को खाने के लाले पड़ने लगे हैं. कहते हैं कि अगर आप शिक्षित हैं तो आपको पेट पालने में मुश्किल नहीं होगा, पर इस लॉकडाउन सभी कहावतें फेल नजर आई हैं.

    आइये हम आपको गोड्डा के उस कोचिंग संस्थान के संचालक की कहानी बताते हैं जो लॉकडाउन की वजह से मंडी में बैठ सड़क किनारे आम बेच रहे हैं. दरअसल ये कहानी है गोड्डा प्रखण्ड के बंका घाट निवासी प्रवीण कुमार की प्रवीण ने MA-BED करने के बाद खुद का कोचिंग संस्थान खोल ग्रामीण बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने का प्रयास किया. 2014 ने संत मेहि नाम से एक प्राइवेट कोचिंग संस्था खोली 6 साल तक कड़ी मेहनत से प्रवीण ने ग्रामीण इलाके के करीबन 200 बच्चे को अपने स्कूल तक ले आए. सब कुछ बेहतर चल रहा था तो प्रवीण ने अपने कोचीग में हॉस्टल भी खोला और होस्टल में 17-18 बच्चे भी थे. फिर लॉकडाउन लगता है औऱ स्कूलों को बन्द करने का आदेश आ जाता है.

    अब बेच रहे आम
    प्रवीण स्कूल खुलने का इंतजार करते रहे. जब एक साल तक स्कूल नही खुला तो प्रवीण आर्थिक रूप से कमजोर हो गया. प्रवीण ने बताया कि परिवार चलाने के लिए कुछ तो करना होता इस लिए इस सीजन आम बेच रहे हैं. कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता. इंसान की परिस्थिति उसे मजबूर कर देती हैं. अभी आम बेच कर इतना कमा पा रहे हैं कि खर्च निकल जाए. बाकी लॉकडाउन खुलने के बाद एक बार फिर से प्रयास करेंगे और कोचिंग को खड़ा करेंगे.