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मनरेगा में गड़बड़झाला! मृतक ने की मजदूरी और भुगतान भी पाया

News18 Jharkhand
Updated: November 6, 2019, 12:47 PM IST
मनरेगा में गड़बड़झाला! मृतक ने की मजदूरी और भुगतान भी पाया
गोड्डा जिले के सदर प्रखंड के नेपुरा पंचायत में मनरेगा में गड़बड़झाला सामने आने के बाद जांच शुरू हो गई है. (फाइल फोटो)

गड़बड़झाले (MNREGA Scam) का पर्दाफाश करने वाले उप मुखिया अवधेश कुमार ने बताया कि ये तो महज एक बानगी है, जो सामने आया है. इस तरह के और भी कई मामले उजागर हो सकते हैं, अगर सही ढंग से इसकी जांच की जाए.

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गोड्डा. जिले में मनरेगा (MNREGA) के तहत अनोखा मामला सामने आया है. पांच साल पहले जिस शख्स की मौत हो गई, उससे मजदूरी भी करा ली गई और उसे भुगतान भी कर दिया गया. सदर प्रखंड के नेपुरा पंचायत में गड़बड़झाला (Scam) सामने आने के बाद जांच शुरू हो गई है. परिवारवालों का कहना है कि मोफिल पासवान की मौत पांच साल पहले हो गई. ऐसे में वह कैसे मजदूरी कर सकता है. इसी माह की पहली तारीख को उसकी मजदूरी का भुगतान भी हो गया. बेटे का कहना है कि यह सब कैसे हुआ, उन्हें नहीं पता.

ये है प्रावधान 

दरअसल जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जरुरतमंदों को आवास उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रावधान के तहत इसके लिए तीन किस्तों में लाभुकों को भुगतान किया जाता है.पहली 40 हजार, दूसरी 75 हजार और अंतिम किस्त में मनरेगा मजदूरी के लिए 15 हजार रुपये की भुगतान की जाती है. ताकि आवास बनाने में गरीबों को मजदूरी भुगतान में दिक्कत न आए. मनरेगा के तहत जो भी भुगतान होता है, वह प्रखंड कार्यालय के द्वारा रोजगार सेवक, पंचायत सेवक एवं पंचायत के मुखिया की संयुक्त अनुशंषा पर होती है.

मृतक से कराई मजदूरी 

सरकार ने अनियमितता पर अंकुश लगाने को लेकर मनरेगा मजदूरी के लिए जो प्रावधान किए हैं, उसके तहत मजदूर से काम कराने से पहले उससे आवेदन लिया जाता है. जिस पर रोजगार सेवक द्वारा स्वीकृति दी जाती है. फिर पेरोल पर काम और कार्य दिवस अंकित किया जाता है. यही प्रक्रिया मजदूरी भुगतान में भी दोहराना होता है. मगर आश्चर्य ये है कि मोफिस पासवान के मामले में बगैर आवेदन, बिना पेरोल पर अंकित किये, मजदूरी भी कराई गई और प्रखंड कार्यालय द्वारा मृत व्यक्ति को भुगतान भी खाते में कर दिया गया. गांव के उपमुखिया ने इस घटना की शिकायत राज्य मनरेगा कार्यालय में की. जिसके बाद जांच शुरू हो गई है. जब इस सिलसिले में रोजगार सेवक रामकुमार से सवाल किया गया, तो वह बगले झांकने लगा.

इस गड़बड़झाले का पर्दाफाश करने वाले उप मुखिया अवधेश कुमार ने बताया कि ये तो महज एक बानगी है, जो सामने आया है. इस तरह के और भी कई मामले उजागर हो सकते हैं, अगर सही ढंग से इसकी जांच की जाए. वहीं जांच के लिए गांव पहुंची जिला विकास विभाग की टीम ने फिलहाल इसपर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

(रिपोर्ट- अजित कुमार)
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First published: November 6, 2019, 12:44 PM IST
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