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खटाई में पड़ी गोड्डा-पीरपैंती रेल परियोजना, राज्य सरकार की चिट्टी ने लगाया अड़ंगा

News18 Jharkhand
Updated: October 11, 2019, 4:54 PM IST
खटाई में पड़ी गोड्डा-पीरपैंती रेल परियोजना, राज्य सरकार की चिट्टी ने लगाया अड़ंगा
ललमटिया क्षेत्र में कोयला के नए भण्डार मिलने के चलते गोड्डा-पीरपैंती रेल परियोजना पर ग्रहण लगता दिख रहा है.

गोड्डा-पीरपैंती रेललाइन (Godda-Pirpainti Rail Project) को साल 2009 में मंजूरी मिली थी. साल 2014 में सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने इसका शिलान्यास किया था. यह परियोजना हंसडीहा से पीरपैंती तक 96 किलोमीटर लंबी रेललाइन परियोजना की अंतिम कड़ी थी, जो गोड्डा से पीरपैंती (64 किलोमीटर) तक बननी थी.

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गोड्डा. (Godda) आजादी के 72 वर्षों के बाद जिलावासियों का रेल (Rail) का सपना, जो साकार होता नजर आ रहा था, राज्य सरकार (Jharkhand Govt) के परिवहन विभाग के एक पत्र से यह खटाई में पड़ता नजर आ रहा है. इसको लेकर अब लोगों का विरोध (Protest) शुरू हो गया है. हाथों में भूमि अधिग्रहण की प्रतियां लेकर लोगों ने राज्य सरकार के खिलाफ गुस्सा निकाला. गोड्डा- पीरपैंती रेललाइन परियोजना (Godda-Pirpainti Rail Project) के रद्द होने के आसार से जिलावासी बेहद नाराज हैं. लोग ललमटिया कोल ब्लॉक को बंद कराने की मांग को लेकर संघर्ष पर उतर गये हैं.

2012 में परियोजना का हुआ था शिलान्यास

गोड्डा-पीरपैंती लाइन को साल 2009 में मंजूरी मिली थी. साल 2014 में सांसद निशिकांत दुबे ने इसका शिलान्यास किया था. यह परियोजना हंसडीहा से पीरपैंती तक 96 किलोमीटर लंबी रेललाइन परियोजना की अंतिम कड़ी थी, जो गोड्डा से पीरपैंती (64 किलोमीटर) तक बननी थी. इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम पांच साल में पूरा हो गया था. अब रैयतों को भुगतान होना था. मगर ललमटिया क्षेत्र में कोयला के नए भण्डार मिलने के बाद इस परियोजना को बंद करने की सिफारिश राज्य सरकार ने केन्द्र से कर दी है. जिसको लेकर जिलावासियों में नाराजगी है.

सियासत करने में जुटा विपक्ष

इधर, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार के इस निर्णय से विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार के खिलाफ एक मुद्दा मिला गया है. जेवीएम विधायक प्रदीप यादव ने निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी योजनाओं का ऐलान सिर्फ वोट पाने के लिए किया जाता है. हालांकि भाजपा के दो विधायक सरकार के बचाव में उतर आए हैं.

स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे का ये ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है. ऐसे में राज्य सरकार और केन्द्रीय कोयला मंत्रालय के इस फैसले से सांसद भी आहत हैं. हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि रेल तो सरकार को देना ही होगा, ये जनता के हक और अधिकार का सवाल है.

गोड्डा- पीरपैंती रेललाइन परियोजना का भविष्य क्या होगा. यह राज्य सरकार और कोयला मंत्रालय के फैसले पर निर्भर करेगा. लेकिन विपक्ष इसे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपने पक्ष में भुनाने में जुट गया है.
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रिपोर्ट-  अजित कुमार

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First published: October 11, 2019, 4:54 PM IST
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