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झारखंड स्थापना दिवस: जिसने अलग राज्य की मांग की जलाई थी अलख, उसी को गए भूल

धनाई किस्कू, आदिवासी नेता

हम बात कर रहे हैं आदिवासी नेता स्वर्गीय धनाई किस्कू की. स्वर्गीय धनाई किस्कू शिबू सोरेन सहित तमाम दिग्गज झारखंडी नेताओं के राजनीतिक गुरु भी माने जाते हैं, इनकी ही अगुवाई में अलग झारखण्ड की मांग शुरूआत गोड्डा जिले के केरवार गांव से हुई थी. आज राज्य अपनी 18वीं स्थापना दिवस मना रहा है लेकिन सभी ने राज्य के इस महान नेता को भुला दिया.

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झारखंड के स्थापना दिवस के अवसर पर 15 नवम्बर को गोड्डा जिले में कई सरकारी और गैर सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. मगर सही मायनों में संथाल परगना के जिस शख्स ने अलग झारखण्ड की पहली अलख जलाई थी, उनकी ही प्रतिमा के सामने एक दीया तक नहीं जलाया गया.

झारखण्ड राज्य बिहार से अलग होकर अब 18 साल का बालिग राज्य हो गया है. मगर झारखण्ड को अलग राज्य बनाने के लिए जिस व्यक्ति ने सबसे पहले पहल की, संथाल परगना में अलग राज्य का बिगुल फूंका, जिस व्यक्ति ने संथाल परगना के आदिवासियों के हितों की लड़ाई की शुरुआत की उसे ही राज्य की स्थापना दिवस के दिन भुला दिया गया.

हम बात कर रहे हैं आदिवासी नेता स्वर्गीय धनाई किस्कू की. स्वर्गीय धनाई किस्कू शिबू सोरेन सहित तमाम दिग्गज झारखंडी नेताओं के राजनीतिक गुरु भी माने जाते हैं, इनकी ही अगुवाई में अलग झारखण्ड की मांग शुरूआत गोड्डा जिले के केरवार गांव से हुई थी. आज राज्य अपनी 18वीं स्थापना दिवस मना रहा है लेकिन सभी ने राज्य के इस महान नेता को भुला दिया.

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धनाई किस्कू के गांव केरवार के युवा या फिर वे लोग जिन्होंने धनाई किस्कू के साथ अलग झारखण्ड की मांग में उनके कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया था, धनाई किस्कू की उपेक्षा से आहत हैं. लोगों का कहना है कि जिसने संथाल परगना का संविधान तक लिखने का काम किया उसकी इस तरह की उपेक्षा से आहत हैं.

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