MLA प्रदीप यादव ने MP निशिकांत दुबे को दी बदाम खाने की सलाह, फेसबुक पर चला वाकयुद्ध

सांसद निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया फिर से आ जाती है.  (फाइल फोटो)

सांसद निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया फिर से आ जाती है. (फाइल फोटो)

दरसल गोड्डा के सदर अस्पताल में अडानी CSR फण्ड द्वारा 25 ऑक्सीजन युक्त बेड बनाने की कवायत पिछले 10 दिनों से चल रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2021, 7:58 AM IST
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गोड्डा. गोड्डा (Godda) की राजनीति में 2 बड़े नाम हमेसा से आमने- सामने देखे जाते हैं. फिर चाहे वो गोड्डा में रेल लाने का श्रेय लेने के होड़ में आमने- सामने हो या फिर किसी अन्य राजनीतिक बयानबाजी में. जी हां हम बात कर रहे हैं गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे (MP Nishikant Dubey) और पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव की. रेल उद्धघाटन कार्यक्रम में हुए झड़प का मामला शांत हुआ भी नहीं था कि अब एक बार फिर दोनों फेसबुक पर आमने- सामने दिखे. फेसबुक (Facebook) पर दोनों एक दूसरे को बदाम खाने की सलाह देते दिखे.

चलिये हम आपको पूरी कहानी बताते हैं. दरसल गोड्डा के सदर अस्पताल में अडानी  CSR फण्ड द्वारा 25 ऑक्सीजन युक्त बेड बनाने की कवायत पिछले 10 दिनों से चल रही है. और रेलगाड़ी की तरह ये 25 बेड का श्रेय लेने का भी काम राजनीतिक दलों द्वारा शुरू कर दिया गया है. दरअसल, मामला शुरु होता है सांसद निशिकांत दुबे के एक पोस्ट के बाद. आज सुबह वो अपने फेसबुक पेज पर लिखते हैं कि अडाणी को गाली देने वाले व मुझे दलाल बताने वालों के लिए यह सूचना है. मैंने खुद गौतम अडाणी जी से बात कर ऑक्सीजन बेड की सुविधा युक्त व्यवस्था बनाने का आग्रह किया था जो बन रहा है. उद्योग का क्या फ़ायदा है यह आज ऑक्सीजन की व्यवस्था बता रही है.

चाहे वो मुखिया फंड का काम ही क्यों न हो

खेती व पानी के साथ लोगों का जान ऑक्सीजन बचा रही है जो बड़े औद्योगिक समूह दे रहा है. यह विकास विरोधी, कम्युनिस्ट व सोशलिस्ट सोच के लोगों के लिए एक सबक़ है. हम अडाणी फ़ाउंडेशन के आभारी हैं. इस पोस्ट के कुछ ही देर बाद प्रदीप यादव के official पेज से एक पोस्ट आता है जिसमे उन्हीने बाहुबली फ़िल्म की एक तस्वीर साझा की हैं और लिखते हैं कि एक माननीय का आज पोस्ट देखा तो बाहुबली फ़िल्म का ये सीन याद आ गया. गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में कोई भी कार्य हो उनकी प्रतिक्रिया प्रायः कुछ ऐसी ही रहती है. चाहे वो मुखिया फंड का काम ही क्यों न हो.
किसी कंपनी का CSR फंड, कंपनी द्वारा क्षेत्र की जनता पर कोई एहसान नहीं होता बल्कि कंपनी द्वारा उस क्षेत्र व क्षेत्रवासियों से ली गई जल, जंगल व जमीन जैसे संसाधन और पर्यावरण के शोषण के एवज में क्षेत्र के विकास के लिए दी जाने वाले राशि (2%) है, जिसका मोनिटरिंग स्थानीय उपायुक्त करते हैं और इस CSR फंड खर्च के लिये कंपनी कानूनी रूप से बाध्य है.  दूसरी बात यह कि यदि माननीय इतने ही चिंतित थे तो क्षेत्र के लिए तो 10 दिन पूर्व ही मिलते अपने मालिक से, जब लगभग सारा कार्य पूरा हो चुका है. तब अंतिम में श्रेय लेने के मकसद से हाथ उठा के यह बोलना कि "#मैंने किया....#मैंने किया" केवल लोगों के आंखों में धूल झोंकने के बराबर है."

पढ़ाई- लिखाई बंद करके केवल कमाई के चक्कर में हैं

इस पोस्ट को अभी घण्टे भी नहीं बीते थे. शायद शहर के सभी नागरिकों तक भी नहीं पहुंचा होगा कि सांसद निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया फिर से आ जाती है.  वो प्रदीप यादव को अनपढों की संज्ञा देते हुए लिखते हैं कि "Csr फंड तब मिलता है जब कम्पनी पैसा कमाती है. मूर्खता की भी हद है प्रदीप यादव जी. कम्पनी अभी बन रही है. लगता है कि पढ़ाई- लिखाई बंद करके केवल कमाई के चक्कर में हैं".  वहीं, मूर्खता वाली बात प्रदीप यादव को भी नही पची. इस पोस्ट के बाद उन्होंने निशिकांत दुबे की बुद्धि बढ़ाने की सोची और लिखते हैं कि "अडानी की भक्ति में ऐसे लीन हैं कि ECL CSR को भी भूल गए. कृपया उन्हें कोई बादाम भेजवा दो!"



प्रदीप यादव के इन पोस्ट के बाद पता नहीं निशिकांत दुबे तक बादाम पहुंचा या नहीं लेकिन यकीन मानिये बादाम वाला पोस्ट उनतक जरूर पहुंच गया. और एक बार फिर से वो फटाक से फेसबुक पर प्रदीप यादव के पोस्ट को शेयर करते हुए लिखते हैं "ये देखिए बुडबक को अडाणी के CSR पर फंसे तो गोल पोस्ट चेन्ज कर कोल इंडिया पर आ गया. बादाम खाकर यादव जी याद करिए इसके लिए प्रह्लाद जोशी जी १२ दिन पहले बोल दिए हैं लगता है कि आजकल अख़बार नहीं पढ़ पाते हैं!"

सेवा भाव जीवित रहना चाहिए

इस पोस्ट के बाद अब तक तो बाते रुक हुई हैं. बाकी ईश्वर से कामना हैं कि बात अधिक आगे ना बढ़े, क्योंकि श्रेय लेने के इस होड़ में गोड्डा पहले ही कलंकित हो चुका है. दोनो नेताओ से अनुरोध हैं कि फ़ेसबुकिया राजनीति को छोड़ जनता की सेवा में हाथ बढ़ाएंं. गोड्डा की जनता आपके साथ है. शायद इस लिए आप दोनों सांसद और विधायक हैं. बाकी राजनीति तो होती रहती है. सेवा भाव जीवित रहना चाहिए.
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