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झारखंड की 'धार्मिक राजधानी' में क्या लगातार तीसरी बार लहराएगा भगवा पताका?

News18 Jharkhand
Updated: April 1, 2019, 8:38 PM IST
झारखंड की 'धार्मिक राजधानी' में क्या लगातार तीसरी बार लहराएगा भगवा पताका?
देवघर का बाबा बैद्यनाथ मंदिर

गोड्डा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला होता रहा है. दोनों को पांच-पांच बार सफलता मिली है.

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झारखंड का गोड्डा लोकसभा क्षेत्र गोड्डा, देवघर और दुमका जिले को अपने में समेटे हुए है. देवघर में बाबा बैद्यानाथ तो दुमका में बासुकीनाथ विराजते हैं. इन दोनों जगहों पर हर साल देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. इसलिए इस क्षेत्र को झारखंड की धार्मिक राजधानी  भी कहते हैं. वहीं, गोड्डा खनिज संपदाओं से भरा हुआ है. यहां का ललमटिया खुला खदान एशिया में प्रसिद्ध है.

पानी क्षेत्र की बड़ी समस्या

संथाल पगरना के इस क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या पानी की है. इस क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए साल 1982 में पुनासी जलाशय योजना शुरू की गई, लेकिन 37 साल बाद भी योजना पूरी नहीं हो पाई है. हालांकि, साल 2017 से इस योजना पर तेजी से काम जारी है. इस योजना के पूरा होने पर 60 हजार एकड़ खेतों को सिंचाई की सुविधा मिल पाएगी.

सांसद पर गोड्डा की अनदेखी करने का आरोप 

वोटर्स की शिकायत है कि सांसद निशिकांत दुबे ने देवघर का विकास किया है, लेकिन गोड्डा पर ध्यान नहीं दिया. देवघर, गोड्डा की तुलना में पहले से विकसित है. धार्मिक और पर्यटन स्थल होने के कारण यहां रोजगार की कमी नहीं है. ऊपर से पिछले पांच सालों में देवघर को एम्स और एयरपोर्ट समेत कई बड़ी योजनाओं की भी सौगात मिली. हालांकि, इस दौरान गोड्डा को भी तोहफे मिले हैं. गोड्डा में 16 हजार करोड़ की लागत से पावर प्लांट बन रहा है. यहां से बिजली की सप्लाई बांग्लादेश को होगी. जानकार बताते हैं कि इस परियोजाना के शुरू हो जाने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेंगे. गोड्डा अब तक रेल मार्ग से भी नहीं जुड़ा है. लेकिन, जल्द ही ये सपना भी साकार होने वाला है. जसीडीह से गोड्डा और गोड्डा से पीरपैंती रेलमार्ग का निर्माण जारी है.

युवा देवघर एम्स को मानते हैं बड़ी सौगात 

देवघर के कारोबारी सांसद निशिकांत दुबे के साथ-साथ केन्द्र और राज्य सरकार के कामकाजों से संतुष्ट हैं. कारोबारियों का कहना है कि सांसद ने बेहतर काम किया है. इससे ना सिर्फ कारोबारियों को बल्कि आम आदमी को भी फायदा हुआ है. क्षेत्र के युवा देवघर एम्स को बड़ी सौगात मानते हैं. युवाओं का ये भी कहना है कि स्कील डेवलपमेंट प्रोग्राम से उन्हें लाभ मिला है.
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5-5 बार कांग्रेस- बीजेपी को मिली है जीत 

गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की 6 सीटें हैं. गोड्डा जिले का गोड्डा, महागामा और पोड़ैयाहाट, देवघर जिले का देवघर और मधुपुर, दुमका जिले का जरमुंडी. गोड्डा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला होता रहा है. दोनों को पांच- पांच बार सफलता मिली है. जबकि JMM और भारतीय लोकदल को एक-एक बार जीत हासिल हुई है. साल 1977 में कांग्रेस से अलग यहां पहली बार जनता पार्टी जीती थी. इसके बाद 1989 में बीजेपी, 1991 में झारखंड मुक्ति मोर्चा को जीत प्राप्त हुई. फिर 1996, 1998, 1999 और 2000 के उपचुनावों में लगातार बीजेपी विजयी होती रही. 2004 में कांग्रेस ने वापसी की, लेकिन 2009 के चुनाव में फिर बीजेपी के हाथों मात खा गई. 2014 के चुनाव में बीजेपी के निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के फुरकान अंसारी को 60 हजार से ज्यादा मतों से हराया.

सांसद का जीत की हैट्रिक लगाने का दावा

पिछले पांच साल में सांसद निशिकांत दुबे के कामकाज को देखें, तो संसद में उनकी उपस्थिति 98% रहा. 337 डिबेट्स में हिस्सा लिया. 676 सवाल पूछे. 48 प्राइवेट मेम्बर बिल प्रस्तुत किये. इसके अलावा उन्होंने संसद में देवघर में संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित कराने की मांग रखी. मौजूदा सांसद निशिकांत दुबे का कहना है कि उनके प्रयास से देवघर और गोड्डा जिले में विकास के कई काम हुए हैं. उनका दावा है कि वे गोड्डा में अपने काम की बदौलत जीत की हैट्रिक लगाएंगे और इस बार जीत का अंतर पिछली बार से बहुत ज्यादा होगा. देखना होगा कि गोड्डा क्षेत्र की जनता इस दावे पर क्या मंशा जताती है. हालांकि इस बार कांग्रेस से नहीं जेवीएम से मुकाबला होगा.

रिपोर्ट- मनीष राज

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First published: April 1, 2019, 7:26 PM IST
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