कोरोना का डर: इकलौता बेटा क्वारंटीन, घर में बुजुर्ग पिता की हो गई मौत; शव को कंधा देने भी नहीं आए लोग

गोड्डा में करीलाल महतो के घर के बाहर जमा ग्रामीण और प्रशासन की भेजी एंबुलेंस.

गोड्डा में करीलाल महतो के घर के बाहर जमा ग्रामीण और प्रशासन की भेजी एंबुलेंस.

Godda Corona Death News: कोरोनाकाल में सामाजिक दूरी रखने की सलाह का विद्रूप चेहरा गोड्डा में दिखा. इकलौते बेटे के क्वारंटीन होने के कारण घर में घंटों तक पड़ा रहा बुजुर्ग पिता का शव. विधायक के निर्देश पर जिला प्रशासन ने किया अंतिम संस्कार का इंतजाम.

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गौरव कुमार

गोड्डा. देशभर में कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार से झारखंड भी अछूता नहीं है. इस संकटकाल में लोगों को संक्रमण से बचने के लिए सामाजिक दूरी रखने की सलाह दी जाती है. यह सलाह बीमारी से बचाव के लिए है, लेकिन कई बार सामाजिक परिस्थितियों में इस सामाजिक दूरी का वीभत्स चेहरा भी नजर आता है. झारखंड के गोड्डा जिले में ऐसी ही एक तस्वीर सामने आई है. गोड्डा के नुंबट्टा गांव में करीलाल महतो की मौत के बाद कोरोना के डर से समाज का एक भी शख्स शव को कंधा देने आगे नहीं आया. करीलाल का इकलौता बेटा भी कोरोना संक्रमण की वजह से क्वारंटीन है. घर में सिर्फ उनकी पत्नी, बहू और मासूम पोते हैं. ग्रामीणों के मुताबिक करीलाल को कुछ दिन पहले ही कोरोना टीका लगा था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई.

नुंबट्टा गांव में बुजुर्ग की मौत के बाद घर में पड़े शव को उठाने के लिए जब कोई आगे नहीं आया, तब किसी ने पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव को स्थिति की जानकारी दी. विधायक ने हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन को तत्काल शव का अंतिम संस्कार कराने का निर्देश दिया. इस बीच घंटों तक शव घर में ही पड़ा रहा. मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जमा थे, लेकिन कोरोना के डर से कोई घर के अंदर झांकने तक का साहस नहीं दिखा पा रहे थे. आखिरकार जब प्रशासन की एंबुलेंस आई, तब जाकर बुजुर्ग करीलाल महतो के अंतिम संस्कार का इंतजाम हो पाया.

बुजुर्ग करीलाल महतो की बहू ने न्यूज 18 के साथ बातचीत में कहा कि उसके ससुर की मौत कोरोना की वजह से नहीं हुई है. महिला ने कहा कि उसके ससुर को कोई बीमारी नहीं थी. हालांकि कुछ दिन पहले उन्हें कोरोना का टीका लगवाया गया था. इस बीच महिला के पति यानी करीलाल महतो के इकलौते बेटे को भी कोरोना हो गया, जिसके बाद उसे क्वारंटीन कर दिया गया. इधर, घर में बुजुर्ग करीलाल ने अंतिम सांस ली, लेकिन उस समय मासूम पोते ही वहां मौजूद थे. घर में कोई वयस्क पुरुष नहीं था, इस कारण शव को ले जाना संभव नहीं था.
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