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108 मंदिरों वाला गांव मलूटी : संवारने की कोशिश में खो रही पहचान

108 मंदिरों वाला गांव मलूटी : संवारने की कोशिश में खो रही पहचान

उपराजधानी दुमका के मलूटी गांव को पर्यटन के मानचित्र पर लाकर उसके विकास का प्रयास किया गया, लेकिन काम शुरू होते ही विरोध के स्वर उभरने लगे.

उपराजधानी दुमका के मलूटी गांव को पर्यटन के मानचित्र पर लाकर उसके विकास का प्रयास किया गया, लेकिन काम शुरू होते ही विरोध के स्वर उभरने लगे.

उपराजधानी दुमका के मलूटी गांव को पर्यटन के मानचित्र पर लाकर उसके विकास का प्रयास किया गया, लेकिन काम शुरू होते ही विरोध के स्वर उभरने लगे.

    किसी भी राज्य के विकास में पर्यटन का विशेष महत्व होता है. यही वजह है कि सरकार द्वारा पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है. उपराजधानी दुमका के मलूटी गांव को पर्यटन के मानचित्र पर लाकर उसके विकास का प्रयास किया गया, लेकिन काम शुरू होते ही विरोध के स्वर उभरने लगे.

    108 मंदिरों वाला गांव मलूटी

    दुमका जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है मलूटी गांव. पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे इस गांव को मंदिरों का गांव कहा जाता है. इस गांव में 108 मंदिर बनाए गए थे. देख रेख के अभाव में वर्तमान समय में 62 मंदिर ही शेष हैं. डीसी राहुल कुमार सिन्हा के मुताबिक 2015 के गणतंत्र दिवस समारोह में राज्य सरकार द्वारा दिल्ली में इसकी झांकी प्रस्तुत की गयी है. झांकी को पुरस्कृत किए जाने के बाद यह गांव पर्यटन मानचित्र पर आया. राज्य सरकार द्वारा इस स्थल को विकसित करने के लिए साढ़े 13 करोड़ रुपए दिए गए हैं.

    1720 ई में बना था पहला मंदिर

    मलूटी में पहला मंदिर 1720 ई में वहां के जमीनदार राखड़चंद्र राय के द्वारा बनाया गया था. मंदिरों में टेराकोटा (पकाई गयी मिट्टी से बनाई गयी कलाकृति) इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है. स्थल को विकसित करने काम शुरू किया गया.

    एतराज यह है

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    मंदिरों को संरक्षित करने के कार्य से ना तो पर्यटक खुश है और ना ही स्थानीय जन प्रतिनिधि. पर्यटक कुमुद वरण राय कहते हैं कि संरक्षण के प्रयास मौलिकता की कीमत पर नहीं होना चाहिए. नए में पुराने की पहचान ही खो गई. वहीं शिकारीपाड़ा विधायक नलिन सोरेन सारी कवायद को विकास की जगह विनाश करार देते हैं.

    जांच के लिए पहुंची आर्कोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया की टीम

    मंदिर संरक्षण समिति के सदस्य सुरेंद्र झा ने भी मंदिर के नए रूप पर आपत्ति जताई. उनकी लिखित शिकायत पर एएसआई ( आर्कोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया) की टीम जांच करने पहुंची. फिलहाल मंदिरों के संरक्षण का कार्य रोक दिया गया है. लेकिन सुरेंद्र झा को चुप रहने के लिए दबाब बनाया जा रहा है.

    बहरहाल, मलूटी पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो यह सभी चाहते हैं, लेकिन मंदिरों की मौलिकता बनी रहे इसका ख्याल रखना जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ी मंदिर की मौलिक स्वरूप का दीदार कर सके.

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