कोरोना काल में गोड्डा के राजनेताओं ने चुनाव को दी अहमियत, मर रही जनता का हाल जानने भी नहीं आए

कोरोना काल में इलाज के लिए परेशान होते लोग आपस में बात करते हुये.

कोरोना काल में इलाज के लिए परेशान होते लोग आपस में बात करते हुये.

कोरोना काल (Corona) में गोड्डा के राजनेता (Politician) एक ओर चुनावी रैलियां करते रहे हैं और दूसरी ओर कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ता रहा. लेकिन इसके बाद भी जिले के सांसद-विधायक (MP-MLA) जनता का हाल जानने तक नहीं पहुंचे.

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गौरव झा

गोड्डा. कोरोना और राजनेताओ का संबंध कुछ विपरीत सा लगता हैं. जहां लोगों को सबसे जरूरी कोरोना लग रहा था तो वहीं राजनेताओं को सबसे महत्वपूर्ण चुनाव लग रहा था और इससे गोड्डा भी अछूता नहीं रहा. आज हम कोरोना के दरमियां गोड्डा के नेताओं की गतिविधियों को बताएंगे. दरसल गोड्डा की राजनीति में 4 नेता बड़े सक्रिय नजर आते हैं, लेकिन दुख इस बात का है कि जितने सक्रिय राजनीति में रहते हैं उतने सक्रिय लोगों की सेवा में रहते तो तस्वीरें और आकड़े दोनों बदल गये होते.

शुरू करते हैं गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे से. अक्सर सांसद जी दिल्ली से ही लीड करते हैं. शायद उन्हें लगता होगा कि जमीन पर उतरने से कहीं कीचड़ ना लग जाए इसलिए इलेक्शन के बाद बहुत कम ही गोड्डा में देखने को मिलते हैं. एकाध बार कभी गोड्डा आ गए तो आए नहीं तो उनकी गाड़ी तो देवघर से ही वापस दिल्ली चली जाती है. ऐसा हम नहीं उनके व्यवहार पर गोड्डा के लोग कहते हैं. हालांकि शहर में श्रवश्रेष्ठ  सांसद के नाम का उनका होर्डिंग जरूर दिख जाता है.

ये सर्वश्रेष्ठ सांसद कोरोना काल मे कहां हैं इनकी खोज सभी को है. मौत के आंकड़े करीबन जब 50 से ऊपर चले गए तब शायद सांसद महोदय की नींद टूटी हैं और कल से उनके कुछ समर्थक अस्पतालो में भोजन बाट रहे हैं. इसके अलावा इस पेंडेमिक में सांसद महोदय एक भी बार नजर तो नहीं आए. क्या एक सांसद होने के नाते चंद पैकेट बांट देने से उनकी जिम्मेदारी पूरी हो गई. अगर नहीं हुई तो उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में कोरोना से उबरने के लिए गोड्डा को कुछ बेहतर दे.
अब आते हैं विधानसभा पर. शहर के सबसे वरिष्ट और सर्वाधिक बार विधायक रहने का खिताब पोड़ैयाहाट से कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव के पास है. इस कोरोना काल में पहले तो ये मधुपुर चुनाव में नजर आए. जब तक मधुपुर चुनाव खत्म नहीं हो गया क्या मतलब की अपने विधानसभा के लोगों के बीच आ जाते. उधर ये अपने वोट बढ़ाते गए इधर कोरोना अपना आंकड़ा बढ़ता गया. चुनाव आ गए रिजल्ट आ गए उसके बाद जीत की खुशियों का आदान-प्रदान हो गया तब विधायक जी अस्पताल पहुंचे. यह देखने की 25 बेड़ का ऑक्सीजन युक्त वार्ड कैसा बना है. देखकर अपनी प्रतिक्रिया दे दी फिर फेसबुक पर श्रेय लेने के लिए तालिया बजवा ली. विधायक और सांसद के बीच बयानबाजी हो गई तब आए मैदान पर. मतलब राजनीति के सभी रंगों से रंगने के बाद पिछले कुछ दिनों से फील्ड में दिख रहे हैं.

अब बारी गोड्डा विधायक अमित मंडल की. इनके युवा जोश में कोरोना काल के दरमियां इनके मन और मस्तिष्क पर क्रिकेट का भूत सवार था. रांची में मुख्यमंत्री के साथ क्रिकेट खेलने के बाद विधायक जी मैन ऑफ द मैच के खिताब के साथ कोरोना भी घर लेकर आए थे. पिछले महीने दिन से अधिक हो गए थे विधायक अमित मंडल खुद कोरोना से लड़ रहे थे. इनको जनता माफ कर भी सकती थी क्योंकि इनके पास खुद कोरोना संक्रमण का बहाना था. लेकिन सवाल ये था कि जिस विधायक के इलेक्शन में उनके काफिले के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता होते हैं क्या वो विधायक अपने कार्यकर्ता से कॉर्डिनेट कर लोगों की सेवा नहीं कर सकते थे. और आगर कर सकते थे तो किया क्यों नहीं.

हलाकि कल एक बार अस्पताल जरूर पहुंचे थे. अब देखना होगा कि किस रफ्तार से विधायक जी अब जनता की सेवा में हाथ बटा पाते हैं. और अंत में बारी आती है महागामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह की. मैडम भी कुछ दिन तक मधुपुर चुनाव में व्यस्त रहीं. खूब चुनाव प्रचार हुआ उसके बाद गोड्डा पहुंची. फील्ड में कुछ समय से नजर भी आ रही हैं उनकी मानें तो वो कहती हैं कि अगर रात के 12 बजे कोई उनसे सहायता के लिए कॉल करता हैं तो वो तत्पर रहती हैं. फिर सवाल ये होता हैं कि आपके ही अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी क्यों होती हैं. विधायक आप सरकार आपकी मुख्यमंत्री आपके स्वास्थ्य मंत्री आपके फिर आपके ही अस्पतालो में डॉक्टर क्यों नही हैं.



जो राजनेता अपनी कुर्शी पर बैठ अपने जीत के दिन गिन रहे हैं उनसे हमारा चंद सवाल हैं. क्या कोविड केयर सेंटर में सभी उपयोगी समान हैं? अगर हैं तो लोग प्राइवेट अस्पतालों  की ओर रुख क्यों कर रहे हैं. कहां है जिले की मॉनिटरिंग टीम जो मरीजों को सरकारी आस्पतलों की ओर नहीं ला पा रहे हैं. और मरीज प्राइवेट में जा रहे हैं.

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