कोरवा जनजाति के 35 परिवारों का दर्द, गरीबी के चलते किस्त में चुका रहे इलाज का खर्च

कोरवा जनजाति के लोग इतने गरीब हैं कि इलाज का खर्च एक साथ नहीं दे पा रहे हैं.

Gumla News: गांव में अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह व मई माह के प्रथम सप्ताह में सभी घर में एक-दो सदस्य बीमार थे. सर्दी, खांसी, बुखार व बदन दर्द से लोग पीड़ित थे. गांव के लोगों ने पास के गांव के झोलाछाप डॉक्टर से अपना इलाज कराया. अब उसे किस्तों में इलाज का खर्च चुका रहे हैं.

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    रिपोर्ट- रूपेश भगत

    गुमला. झारखंड के गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड की बारडीह पंचायत के केवना गांव में विलुप्तप्राय कोरवा जनजाति (Korwa Tribe) के 35 परिवार रहते हैं. पहाड़ पर बसे इस गांव के लोगों की माने तो वे बीमारी (सर्दी व बुखार) से जूझ रहे थे, तो किसी ने उनकी सुध नहीं ली. अब जब वे बीमारी से उबर गये, तो स्वास्थ्य विभाग की सर्वे टीम गांव हालचाल लेने पहुंची. ग्रामीण बताते हैं कि उनके पास पैसे नहीं है इसलिए इलाज करने वाले डॉक्टर को अब वे किस्त में भुगतान कर रहे हैं.

    केवना गांव पहाड़ पर बसा है. चारों ओर घने जंगल हैं. गांव तक जाने के लिए पगडंडी और कच्ची सड़क ही एक मात्र साधन है. केवना गांव में विलुप्तप्राय कोरवा जनजाति के 35 परिवार हैं. हर घर एक दूसरे से काफी दूरी पर हैं. कुछ घर आधा किमी की दूरी पर बसा हुआ है. इस गांव में अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह व मई माह के प्रथम सप्ताह में सभी घर में एक-दो सदस्य बीमार थे. सर्दी, खांसी, बुखार व बदन दर्द से लोग पीड़ित थे. गांव के लोगों ने सोकराहातू गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर से जांच करायी. जांच में 100 रुपये और दवा के लिए अलग से पैसे लगे.

    ग्रामीण बताते हैं कि 1200 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक एक सदस्य के इलाज में लगा. कोरवा जनजातियों के पास डॉक्टर को देने के लिए पैसे नहीं था. इसलिए डॉक्टर ने किस्त बांध दिया. अब कोरवा जनजाति के लोग जलावन की लकड़ी बेचकर या मजदूरी कर पैसा जमा करेंगे. इसके बाद डॉक्टर को किस्त में पैसा चुकाएंगे.

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गांव एक महीने तक बीमारी से जूझता रहा, परंतु किसी ने हालचाल जानने का प्रयास नहीं किया. सर्वे टीम भी गांव नहीं गयी. किसी की कोरोना जांच भी नहीं हुई. न ही किसी को मेडिकल किट दिया गया.

    ग्रामीणों ने कहा कि जब गांव के लोग पूरी तरह स्वस्थ हो गये. तो 10 जून को गांव में स्वास्थ्य टीम आयी थी. 10 लोगों को कोरोना टीका का प्रथम डोज दिया गया है.

    गांव के रामलखन कोरवा ने कहा कि अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में मेरी पत्नी बीमार हो गयी थी. स्थिति गंभीर थी. सोकराहातू गांव में एक डॉक्टर बैठते हैं. उन्हीं से जांच कराया था. जांच करने का फीस 100 रुपये लिया. दवा का 1100 रुपये लगा. कुछ पैसा दिये हैं. कुछ पैसा बाद में कमाने के बाद किस्त में देंगे. जब हमारे गांव से बीमारी खत्म हो गयी. तब स्वास्थ्य टीम आयी थी. वह भी सिर्फ कोरोना टीका दिया है. जिस समय पूरा गांव बीमारी की चपेट में था उस समय तो कोई नहीं आया.

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