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गुमला में धड़ल्ले से चल रहा धर्मांतरण का खेल, विरोध करने पर 2 सरना परिवारों का सामाजिक बहिष्कार

गुमला में धड़ल्ले से चल रहा धर्मांतरण का खेल, विरोध करने पर 2 सरना परिवारों का सामाजिक बहिष्कार

गुमला के सुदूर ग्रामीण इलाकों में ईसाई मिशनरियों का धर्मांतरण का खेल जारी है और यहां उनकी समानांतर सरकार चल रही है

गुमला के सुदूर ग्रामीण इलाकों में ईसाई मिशनरियों का धर्मांतरण का खेल जारी है और यहां उनकी समानांतर सरकार चल रही है

Jharkhand News: गुमला शहर से कोसों दूर जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे गढ़टोली में करीब 55 घरवाले इस टोले में ईसाई मिशनरियों का ऐसा आतंक है कि उनकी मर्जी के बगैर यहां पत्ता तक नहीं हिलता. बताया जा रहा है कि वर्ष 2006 में इस टोले में धर्मांतरण का खेल शुरू हुआ था. ईसाई मिशनरियों के दबाव कह लीजिए या असर है कि सरना धर्म को मानने वाले इस टोले में आधे से ज्यादा लोगों ने अब चर्च जाना शुरू कर दिया है

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    (संजय सिन्हा)

    गुमला. झारखंड के गुमला (Gumla) जिले के ग्रामीण इलाकों में धर्मांतरण (Conversion) का खेल धड़ल्ले से जारी है. ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण के खेल को सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया जा रहा है. आरोप है कि धर्मांतरण साजिश (Conversion Racket) का विरोध करने वालों को सामाजिक बहिष्कार (Social Boycott) और जान से मारने की धमकी दी जा रही है. गुमला से 35 किलोमीटर दूर सदर प्रखंड के गढ़टोली और आसपास के इलाकों में ईसाई मिशनरी (Christian Missionary) वर्षों से अपने मिशन में सक्रिय हैं. इसकी जानकारी मिलने पर न्यूज़ 18 की टीम ने इसकी सच्चाई की पड़ताल करने का निर्णय लिया.

    गुमला शहर से कोसों दूर जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे गढ़टोली में करीब 55 घरवाले इस टोले में ईसाई मिशनरियों का ऐसा आतंक है कि उनकी मर्जी के बगैर यहां पत्ता तक नहीं हिलता. बताया जा रहा है कि वर्ष 2006 में इस टोले में धर्मांतरण का खेल शुरू हुआ था. ईसाई मिशनरियों के दबाव कह लीजिए या असर है कि सरना धर्म को मानने वाले इस टोले में आधे से ज्यादा लोगों ने अब चर्च जाना शुरू कर दिया है. ‌करीब 30 सरना परिवारों ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है. ईसाई मिशनरियों का क़हर दो गोप परिवारों पर टूटा है. बुजुर्ग सालिक गोप का परिवार करीब छह महीने से सामाजिक बहिष्कार झेलने को मजबूर है. इस परिवार को हर पल जान से मारने की धमकी मिल रही है.

    ईसाई मिशनरी धर्मांतरण के लिए लगातार बना रहे हैं दबाव

    जान से मारने की धमकियों के चलते खौफजदा सालिक गोप का परिवार अपने घर से जल्दी निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता. सालिक गोप का बेटा बुढेश्वर पारा टीचर है, लेकिन सामाजिक बहिष्कार के कारण वो पिछले छह महीने से स्कूल नहीं जा पा रहा. रात के करीब साढ़े नौ बजे जब हम इस परिवार के पास पहुंचे तब बड़ी मशक्कत के बाद दरवाजा खुला. हमारे द्वारा हिम्मत बढ़ाने के बाद ही इनसे बात हो पायी.

    उन्होंने बताया कि गाय पालने वाले उनके परिवार को गौमांस खाने का लगातार दबाव दिया जा रहा है. साथ ही उन्हें खेती करने की इजाजत नहीं है. उनके मुताबिक ‌परिवार को गांव के‌ कुएं से पानी लेने के लिए रोक दिया गया है. उनके बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे है. परिवार की आमदनी का जरिया खत्म कर उसका मनोबल तोड़ने की कोशिश हो रही है. हालांकि, सालिक गोप भले ही दहशत से घर से बाहर नहीं निकलते लेकिन उन्होंने कहा कि ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण के दबाव के आगे वो झुकने को तैयार नहीं.

    गुमला के सुदूर ग्रामीण इलाकों में ईसाई मिशनरियों की समानांतर सरकार चल रही है. भोले भाले आदिवासी सरना परिवारों को दबाव देकर उनका मनोबल तोड़ा जा रहा है. जो नहीं टूट रहे उनका हुक्का पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुनाया जा रहा है. जिले में ईसाई मिशनरियों के द्वारा कानून का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है. पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में ही दो परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया. लेकिन धर्मांतरण के इस खेल को रोकने के लिए कानून का डंडा नजर नहीं आ रहा.

    Tags: Christian conversion, Conversion case, Gumla news, Jharkhand news, Religious conversion

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