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गुमला विधानसभा क्षेत्र: उरांव जाति के नेताओं का रहा है दबदबा, 6 बार जीती बीजेपी

गुमला विधानसभा क्षेत्र: उरांव जाति के नेताओं का रहा है दबदबा, 6 बार जीती बीजेपी

2019 के चुनाव के लिए यहां उम्मीदवारों की लंबी कतार है. स्व कार्तिक उरांव के दामाद व पूर्व आईजी डॉ अरुण उरांव के भाजपा में शामिल होने से पार्टी में टिकट के दावेदारों में खलबली मची है. वहीं जेएमएम से भूषण तिर्की प्रबल दावेदार हैं.

2019 के चुनाव के लिए यहां उम्मीदवारों की लंबी कतार है. स्व कार्तिक उरांव के दामाद व पूर्व आईजी डॉ अरुण उरांव के भाजपा में शामिल होने से पार्टी में टिकट के दावेदारों में खलबली मची है. वहीं जेएमएम से भूषण तिर्की प्रबल दावेदार हैं.

1995 से 2014 तक बीजेपी (BJP) और जेएमएम (JMM) का गुमला सीट (Gumla Assembly Seat) पर टक्कर होता रहा है. कांग्रेस के वोट घटे हैं. 2014 के चुनाव में बीजेपी के शिवशंकर उरांव को यहां पर जीत मिली.

    गुमला. बाबा टांगीनाथ धाम का क्षेत्र गुमला (Gumla Assembly Constituency) आदिवासी बहुल सीट है. यहां से आदिवासी समाज (Tribal Society) के महानायक कहे जाने वाले स्वर्गीय कार्तिक उरांव ने अपनी राजनीति की शुरुआत की थी. इस इलाके की आदिवासी संस्कृति देश- दुनिया में अलग पहचान रखती है. बिहार के समय से ही गुमला को खेल नगरी की पहचान मिली है. हालांकि आज भी यह इलाका विकास से दूर है. पूरी तरह कृषि पर आश्रित यहां के आदिवासी परिवार धान की खेती के बाद पलायन (Migration) करने को मजबूर हो जाते हैं.

    उरांव जाति के नेताओं का रहा है दबदबा

    गुमला विधानसभा क्षेत्र की मूल समस्याओं पर ध्यान दें, तो गरीबी और बेरोजगार के साथ आज भी यहां के कई इलाके सड़क के लिए तरस रहे हैं. शिक्षा और स्वास्थ्य के भी हाल बेहाल हैं. 1951 में अनुसूचित जनजाति के लिए गुमला विधानसभा क्षेत्र बना था. सुकरू उरांव यहां के पहले विधायक थे. इस सीट पर उरांव जाति के विधायकों का दबदबा रहा. सबसे अधिक छह बार भाजपा से विधायक चुने गये हैं. जबकि यहां से कांग्रेस के तीन व जेएमएम के दो विधायक रह चुके हैं.

    ऐसा रहा है चुनावी इतिहास 

    कांग्रेस के बैरागी उरांव तीन बार विधायक बनने वाले एकमात्र नेता हैं. 1990 के बाद कोई भी विधायक यहां से दूसरी बार जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच पाए हैं. जनता या तो चुनाव में हरा देती है या फिर पार्टी टिकट नहीं मिलता है. गुमला से एक भी महिला विधायक नहीं बनी है. गुमला सीट के अंतर्गत  गुमला, रायडीह, चैनपुर, डुमरी व जारी प्रखंड पड़ते हैं. 1995 से 2014 तक बीजेपी और जेएमएम का गुमला सीट पर टक्कर होता रहा है. कांग्रेस के वोट घटे हैं.

    1999 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुदर्शन भगत यहां से विधायक बने. 2004 के चुनाव में बीजेपी को हराकर जेएमएम के भूषण तिर्की यहां से विधायक बने. लेकिन 2009 के चुनाव में बीजेपी के कमलेश उरांव ने जेएमएम से यह सीट छीन ली. 2014 के चुनाव में बीजेपी के शिवशंकर उरांव को यहां पर जीत मिली.

    इस बार कई दावेदार 

    2019 के चुनाव के लिए यहां उम्मीदवारों की लंबी कतार है. स्व कार्तिक उरांव के दामाद व पूर्व आईजी डॉ अरुण उरांव के भाजपा में शामिल होने से पार्टी में टिकट के दावेदारों में खलबली मची है. वहीं जेएमएम से भूषण तिर्की प्रबल दावेदार हैं. पूर्व आईपीएस हेमंत टोप्पो भी दावा ठोक रहे हैं. कांग्रेस भी चुनाव लड़ना चाहती है. इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या 2,18,475 है, इसमें महिलाएं 1,08,284 और पुरुष 1,10,191 शामिल हैं.

    (इनपुट- सुशील कुमार)

    ये भी पढ़ें- पुलिस सेवा से सियासत में आए और केन्द्रीय मंत्री बने, पढ़ें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव के बारे में

     

     

    Tags: Assembly Election 2019, Gumla S27a068, Jharkhand Assembly Election 2019

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