पढ़ाई में निजी विद्यालयों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं यहां की आदिवासी बच्चियां
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पढ़ाई में निजी विद्यालयों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं यहां की आदिवासी बच्चियां
कस्तुरबा विद्यालय, गुमला

यहां की आदिवासी व गरीब बच्चियों को पढ़ाई का बेहतर माहौल उपलब्ध हो पाया है. नतीजा यहां की बच्चियां अब पढ़ाई में निजी विद्यालयों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं.

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गुमला जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों को पिछले दो-तीन सालों में जिस तरह से रघुवर सरकार ने संसाधन उपलब्ध कराए हैं, उससे यहां की आदिवासी व गरीब बच्चियों को पढ़ाई का बेहतर माहौल उपलब्ध हो पाया है. नतीजा यहां की बच्चियां अब पढ़ाई में निजी विद्यालयों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं.

गुमला जिले के बारह में से दस प्रखंडों में कस्तूरबा विद्यालय संचालित हो रहे हैं. इन स्कूलों में वे बच्चियां पढ़ रही हैं, जो किसी ना किसी कारण से पहले पढ़ाई छोड़ चुकी थीं. लेकिन सरकारी प्रयास से ऐसी आदिवासी बच्चियों को कस्तूरबा विद्यालय में लाया गया और अब सीएम की खास पहल पर इन बच्चियों को स्कूल में बेहतर सुविधा दी जा रही है. स्कूलों में सभी विषयों के शिक्षक उपलब्ध कराये गए हैं. प्रयोगशाला, जिम, कराटे व बैंड प्रशिक्षण भी इन बच्चियों को उपलब्ध कराये गए हैं.

कस्तूरबा विद्यालय की बच्चियों को कम्प्यूटर के साथ-साथ टैब भी उपलब्ध कराये गए हैं. बाकायदा कम्प्यूटर टीचर के जरिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. शिक्षकों की मानें, तो बच्चियां हर आधुनिक विषय वस्तु से पूरी तरह परिचित हैं. विद्यालय की वार्डेन की मानें तो कस्तूरबा विद्यालय को जिस तरह सीएम ने सहयोग कर बेहतर बनाया है, उससे झारखंड की बेटियों को पढ़ने का काफी बेहतर माहौल मिला है.
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