स्टोर में बेकार पड़े सिलेंडरों व चीजों में लगाई जुगाड़ और बना दिया ऑक्सीजन फ्लोमीटर!

गुमला के अस्पताल में जुगाड़ से बना फ्लोमीटर चल रहा है.

गुमला के अस्पताल में जुगाड़ से बना फ्लोमीटर चल रहा है.

Jharkhand News : आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है और समस्या से जुगाड़ का रास्ता खुलता है. ऑक्सीजन फ्लोमीटरों की कमी थी, अस्पताल को मिल नहीं रहे थे, तो देसी जुगाड़ से समस्या का हल अस्पताल के ही अधिकारी ने निकाला.

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गुमला. प्रतिभा समय या स्थान की मोहताज नहीं होती और यह बात सही साबित कर दिखाई है सदर अस्पताल के एक अधिकारी ने. कोरोना वायरस के प्रकोप के समय के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की किल्लत के बीच सदर अस्पताल के भंडार इंचार्ज ने बेकार पड़े ऑक्सीजन सिलेंडरों को जुगाड़ से ऑक्सीजन फ्लो मीटर बना दिया जिससे मरीज़ों का इलाज भी संभव हो सका. अहम बात यह है कि सदर अस्पताल ने ऑक्सीजन फ्लोमीटरों की कमी के चलते मांग की थी, लेकिन आपूर्ति नहीं हो पा रही थी, जिससे अस्पताल प्रबंधन के साथ ही मरीज और उनके परिजन भी काफी परेशान थे.

शहर के सदर अस्पताल में स्टोर के इंचार्ज श्याम कुमार ने देसी जुगाड़ करते हुए ऑक्सीजन फ्लो मीटर बनाकर कई समस्याओं का समाधान कर दिया. रांची के अस्पताल से पलो मीटर की आपूर्ति न हो पाने के चलते जो समस्याएं पेश आ रही थीं, उनका एक त्वरित निदान तो संभव हुआ ही है. खास बात यह भी है कि कुमार ने यह कारनामा वेस्ट से किया है यानी इसे रीसाइकिलिंग भी कहा जा सकता है.

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जुगाड़ से कैसे बनाया फ्लोमीटर?
अस्पताल के पुराने और बेकार पड़े ऑक्सीजन फ्लो मीटरों को जुगाड़ से रिपेयर करते हुए कुमार ने लगभग 50 ऑक्सीजन फॉलोमीटर तैयार कर दिए. इसमें सबसे बड़ी अड़चन यह थी कि मेजरिंग बोतल न होने के कारण उसे शुरू करना मुमकिन नहीं हो रहा था. ऐसे में, कुमार ने बच्चों को दूध पिलाए जाने के लिए इस्तेमाल होने वाली बोतल का इस्तेमाल किया और फ्लोमीटर एकदम सही चलने लगा.

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सदर अस्पताल में स्टोर इंचार्ज ने बनाया फ्लोमीटर.

ऑक्सीजन फ्लोमीटर में जहां 250ml की कांच की बोतल लगी रहती है, वहां फीडिंग बोतल के इस्तेमाल को दिखाती इस देसी जुगाड़ को जो भी देख रहा है, तारीफ कर रहा है. हालांकि इस बारे में अभी विशेषज्ञों ने कोई राय ज़ाहिर नहीं की है कि यह तकनीक कितनी कारगर है.

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