Covid 19: झारखंड के एक गांव में कोरोना ने उजाड़ा परिवार, चार बच्चे हुए अनाथ, 10 दिन में 6 मौतें

गुमला के एक परिवार के सामने अस्तित्व का संकट.

गुमला के एक परिवार के सामने अस्तित्व का संकट.

Gumla News: गुमला ज़िले चुंदरी नवाटोली गांव में बीमारी तेज़ी से फैल रही है. ज़्यादातर लोग बीमार हैं और साफ तौर पर इनमें कोरोना वायरस के लक्षण हैं, लेकिन न तो अब तक स्वास्थ्य सेवाएं यहां पहुंची हैं और न ही कोई जनप्रतिनिधि.

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गुमला. ज़िले के घाघरा थाना क्षेत्र के चुंदरी नवाटोली गांव में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना सामने आई. यहां बीमारी ने चार बच्चों के सिर से माता व पिता का साया छीन लिया. बच्चों की ज़िम्मेदारी अब अब 75 वर्षीय दादा एतवा उरांव के ऊपर आ गई है. अब घर में कमाने वाला कोई नहीं रह गया है. परिवार के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा आ खड़ा हुआ है. सवाल उठ रहा है कि क्या इन दोनों की मौत कोरोना से हुई, क्योंकि लक्षण तो कोरोना जैसे ही है. लेकिन पुष्टि कैसे हो. क्योंकि सेहत की जांच करने के लिए कोई टीम गांव नहीं पहुंची. गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं हैं ही नहीं.

जानकारी के मुताबिक चार महीने पहले लिटु उरांव की मौत किसी बीमारी के चलते हुई थी और उसके एक महीने बाद उसकी पत्नी करमी देवी की मौत छाती में दर्द और सांस लेने में दिक्कत की वजह से हुई.

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परिवार में बचे दादा, कितना मुश्किल हो गया है जीना?
लिटु और करमी अपने चार बच्चों 16 वर्षीय बेटी गुड़िया कुमारी, 14 वर्षीय प्रेम उरांव, 8 वर्षीय बहादुर उरांव व 6 वर्षीय फुलकुमारी को रोता छोड़ गए हैं. 75 वर्षीय वृद्ध दादा इन बच्चों की सेवा करें या ये बच्चे दादा की, यह भी एक विडंबना है! स्थिति यह है कि राशन कार्ड के ज़रिये सरकारी सुविधा के नाम पर इन लोगों को सिर्फ चावल मिलता है. लेकिन बाकी की चीज़ों के लिए ये मोहताज ही हैं.

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इन चार बच्चों के मां बाप की मौत कोरोना से होने की आशंका है.

क्या कोरोना से गई जान?



बताया गया है कि दोनों मृतकों में कोरोना के लक्षण साफ तौर पर दिख रहे थे. लेकिन जानकारी के अभाव में न इन दोनों ने जांच करवाई और न ही प्रशासन की तरफ से कोई टीम जांच के लिए पहुंची. हालात देखें तो ग्रामीण इलाकों में लोग जांच नहीं करा रहे हैं, जिससे मौतों की संख्या बढ़ रही है. प्रशासन भी ग्रामीण इलाकों तक जांच नहीं कर पा रहा है, जिससे संक्रमण की स्थिति धीरे-धीरे ग्रामीण इलाकों तक विकराल हो रही है.

प्रशासन से कोई हालचाल लेने नहीं पहुंचा

चुंदरी गांव में ही एक और परिवार भी इसी तरह की विडंबना का शिकार हुआ. पहले ललिता देवी के 40 वर्षीय पति सुमेश उराँव की मृत्यु हो गई. इसके ठीक 10 दिन बाद उनकी मां अमृत देवी भी नहीं रहीं. ललिता देवी का कहना है कि गांव में सर्दी खांसी एवं सांस लेने की तकलीफ से बहुत सारे ग्रामीण जूझ रहे हैं, मगर प्रखंड प्रशासन से कोई अब तक हाल-चाल लेने गांव नहीं पहुंचा है.

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10 दिन में हो चुकी हैं 6 मौतें

ग्रामीणों की मानें तो पिछले 10 दिनों में कम से कम 6 मौतें हो चुकी हैं, लेकिन न तो ज़िला प्रशासन की ओर से कोई आया और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अब तक कोई सुध ली. लोगों को डर है कि इस तरह की लापरवाही से कहीं पूरा गांव ही बीमारी की चपेट में न आ जाए.

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