करगिल विजय दिवस: गुमला के तीन लाल ने लहू से लिखी वीरता की अमिट कहानी

शहीद बिरसा उरांव की पत्नी मीला उरांव बताती हैं कि उन्हें पति की शहादत की सूचना एक सप्ताह बाद पुलिस के माध्यम से मिली थी. आज भी पति के बलिदान पर गर्व होता है. पिता से प्रेरित होकर ही बेटी पुलिस में गयी है.

News18 Jharkhand
Updated: July 26, 2019, 11:13 AM IST
करगिल विजय दिवस: गुमला के तीन लाल ने लहू से लिखी वीरता की अमिट कहानी
कारगिल युद्ध में गुमला के लाल शहीद बिरसा उरांव ने दी थी जान की कुर्बानी
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Updated: July 26, 2019, 11:13 AM IST
आज पूरा देश कारगिल विजय दिवस मना रहा है. 20 साल पहले 26 जुलाई 1999 को हमारी सेना ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को परास्त किया था. हालांकि इस विजयगाथा को लिखने में सैंकड़ों जवानों को अपनी जान की कुर्बानी देनी पड़ी. झारखंड के गुमला जिले के तीन लाल ने अपने लहू से वीरता की अमिट कहानी लिखी. शहीद जॉन अगस्तुस एक्का, शहीद बिरसा उरांव और शहीद विश्राम मुंडा के नाम आज भी जिले में सम्मान के साथ लिये जाते हैं. लोगों का कहना है कि गुमला के इन तीनों बेटों को देश कभी भूला नहीं सकता. इनके शौर्य को नमन है.

शहीद के परिवार को सुविधाओं का इंतजार

रायडीह प्रखंड के परसा तेलेया गांव के रहने वाले जॉन अगस्तुस एक्का का तिरंगा में लिपटा शव जब गांव पहुंचा था, तो पूरा इलाके में गर्व और गम का माहौल था. उस पल को याद कर शहीद की पत्नी कहती हैं कि तब मेरे दोनों बेटे छोटे थे, जिसकी चिंता मुझे सता रही थी. अगस्तुस देश के लिए शहीद हुए, पर परिवार को जो सुविधा मिलनी चाहिए थी, वह आज भी नहीं मिली है. परिवार आज भी सेना व सरकार से मिलने वाली सुविधा से महरूम है.

शहीद की पत्नी ने बताया कि अगस्तुस लांस नायक से हवलदार रैंक तक गये थे. इस दौरान उन्हें चार मेडल मिले थे. उनका सपना दोनों बेटों को फौज में बड़ा अधिकारी बनाने का था, जो अब अधूरा रह गया.

दरअसल शहीद एक्का की पत्नी के आधारकार्ड में टाइटल लकड़ा लिखा हुआ है. इस वजह से उन्हें मार्च 2018 से पेंशन नहीं मिल रही है. सरकार ने जमीन- घर देने का वादा किया, वो भी नहीं मिला है.

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शहीद बिरसा उरांव की पत्नी मीला उरांव


पति के बलिदान पर गर्व है..
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सिसई प्रखंड के बरी जतराटोली निवासी शहीद बिरसा उरांव की शहादत पर परिवार को फक्र है. शहीद हवलदार बिरसा उरांव फर्स्ट बटालियन बिहार यूनिट के जवान थे. उन्हें उनकी वीरता के लिए कई सम्मान मिले. नागालैंड सम्मान सेवा, सैनिक सुरक्षा मेडल, संयुक्त राष्ट्र संघ से ओवरसीज मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से वह सम्मानित हुए.

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शहीद बिरसा उरांव का परिवार


पत्नी मीला उरांव बताती हैं कि उन्हें पति की शहादत की सूचना एक सप्ताह बाद पुलिस के माध्यम से मिली थी. आज भी पति के बलिदान पर गर्व होता है. पिता से प्रेरित होकर ही बेटी पुलिस में गयी है.

भतीजा अरविंद उरांव कहते हैं कि बड़े पापा भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके शौर्य की गाथा पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी. उन्हीं से प्रेरणा लेकर हम भी सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं.

करीबी रिश्तेदार निर्मल उरांव कहते हैं कि तब हमलोगों को काफी गौरव महसूस होता है, जब बड़े मंचों से शहीद बिरसा उरांव की शहादत को नमन किया जाता है.

इनपुट- सुशील कुमार

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First published: July 26, 2019, 11:11 AM IST
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